खेती और जलाशयों पर संकट के बादल
सामान्य से आधी बारिश, बुवाई का रकबा बुरी तरह प्रभावित
जुलाई में भी अल-नीनो के असर से वर्षा कमी की आशंका
हुब्बल्ली. दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमजोर शुरुआत ने कर्नाटक में चिंता बढ़ा दी है। जून का आधा महीना बीत जाने के बावजूद अपेक्षित वर्षा नहीं होने से कृषि गतिविधियां प्रभावित हुई हैं और किसानों के सामने संकट के बादल मंडराने लगे हैं। राज्य में 4 जून से मानसून सक्रिय होने के बाद 15 जून तक केवल 19 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य रूप से 53 मिमी बारिश होनी चाहिए थी।
बुवाई लक्ष्य से काफी पीछे
कम वर्षा के कारण अब तक केवल 7.87 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हो सकी है, जबकि इस समय तक 46.29 लाख हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। पिछले वर्ष इसी अवधि तक राज्य के जलाशय 70 प्रतिशत तक भर चुके थे, लेकिन इस बार उनमें मात्र 20-21 प्रतिशत जल भंडारण ही हो पाया है।
मलेनाडु और तटीय क्षेत्रों में भी बारिश की कमी
सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि परंपरागत रूप से अधिक वर्षा वाले तटीय और मलेनाडु क्षेत्रों में भी इस बार भारी कमी दर्ज की गई है। तटीय क्षेत्र में 41 प्रतिशत तथा कावेरी बेसिन में 36 प्रतिशत वर्षा की कमी है। मलेनाडु क्षेत्र में सामान्य 132 मिमी के मुकाबले केवल 84.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जिससे नदियों और जलाशयों के जलस्तर पर असर पडऩे की आशंका बढ़ गई है।
जुलाई में अल-नीनो का असर पडऩे की आशंका
मौसम विशेषज्ञ श्रीनिवास रेड्डी के अनुसार जुलाई में अल-नीनो का प्रभाव दिखाई दे सकता है। इससे वैश्विक तापमान बढऩे के साथ वर्षा में और कमी आने की आशंका है। जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई में बारिश होने की संभावना है, लेकिन वह बिखरी हुई और सामान्य स्तर की ही रह सकती है। जुलाई में अल-नीनो का प्रभाव भी देखने को मिल सकता है।
सरकार सतर्क, अधिकारियों को निर्देश
संभावित सूखे की स्थिति को देखते हुए सरकार सतर्क हो गई है। इस संबंध में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने अधिकारियों को अतिवृष्टि और अनावृष्टि, दोनों परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं।
बीज और उर्वरकों का पर्याप्त भंडार
कृषि विभाग के अनुसार वर्ष 2026 के खरीफ मौसम में 82.48 लाख हेक्टेयर में खेती का लक्ष्य रखा गया है। विभिन्न फसलों के लिए 4.71 लाख क्विंटल बीजों की मांग के मुकाबले 5.46 लाख क्विंटल बीज उपलब्ध हैं। वहीं, अप्रेल से सितंबर 2026 के दौरान 30.05 लाख मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता का अनुमान लगाया गया है, जिसकी आपूर्ति केंद्र सरकार द्वारा चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।
किसानों की बढ़ी चिंता
कमजोर मानसून की शुरुआत ने कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले राज्य में किसानों की चिंता बढ़ा दी है। यदि जुलाई में भी वर्षा सामान्य से कम रही, तो इसका असर फसलों के साथ-साथ पेयजल और बिजली उत्पादन पर भी पड़ सकता है।
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