कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के शीर्ष नेता होंगे शामिल
मानसून से पहले तैयार हुआ बांध, किसानों में खुशी
कोप्पल. कल्याण कर्नाटक के लाखों किसानों के लिए राहत भरी खबर है। तुंगभद्रा जलाशय में लगाए गए नए क्रेस्ट गेटों का लोकार्पण 25 जून को मुनिराबाद में किया जाएगा। मानसून की शुरुआत से पहले निर्माण कार्य पूरा होने से कर्नाटक के चार जिलों के अलावा आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के किसानों में भी उत्साह का माहौल है।
तीन राज्यों के शीर्ष नेता होंगे मौजूद
लोकार्पण समारोह में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबु नायडू, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी तथा राज्य के जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी सहित कई गणमान्य लोगों के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम की तैयारियों में कोप्पल जिला प्रशासन जुटा हुआ है।
अगस्त 2024 की घटना के बाद बदले गए गेट
वर्ष 1953 में निर्मित तुंगभद्रा बांध के मूल गेटों की आयु लगभग 50 वर्ष आंकी गई थी, लेकिन अपेक्षा से अधिक समय तक उनका उपयोग जारी रखा गया। 10 अगस्त 2024 की रात करीब 60 फीट चौड़ा और 20 फीट ऊंचा एक विशाल गेट टूटकर गिर गया था, जिससे बड़ी मात्रा में पानी व्यर्थ बह गया और राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया।
इसके बाद सरकार ने दिसंबर 2025 में नए क्रेस्ट गेट लगाने का निर्णय लिया। गुजरात के अहमदाबाद स्थित हार्डवेयर टूल्स एंड मशीन प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को यह कार्य सौंपा गया। कंपनी को पश्चिम बंगाल के पराक बैराज, कृष्णराज सागर (केआरएस) तथा नारायणपुर बांध के गेट निर्माण का अनुभव है।
51.81 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुए नए गेट
करीब 51.81 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किए गए इन गेटों का निर्माण गदग के समीप अडविसोमापुर और विजयनगर जिले के टीबी बोर्ड यार्ड सहित विभिन्न स्थानों पर किया गया। कंपनी ने निर्धारित समय में कार्य पूरा कर दिया है।
दूसरे फसल सीजन का पानी छोडऩे से किया था परहेज
गेट बदलने के लिए सरकार ने पिछले दिसंबर में दूसरी फसल के लिए पानी नहीं छोडऩे का निर्णय लिया था। इससे कोप्पल, रायचूर, बल्लारी और विजयनगर जिलों के किसानों को एक फसल का त्याग करना पड़ा था। हालांकि, समय पर काम पूरा होने से किसानों की चिंता अब काफी हद तक दूर हो गई है।
बांध में फिलहाल 9 टीएमसी पानी
कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा प्रबंधन केंद्र के अनुसार, 16 जून तक तुंगभद्रा जलाशय में 9 टीएमसी पानी उपलब्ध है। पिछले वर्ष इसी अवधि में जलाशय में 28 टीएमसी पानी था।
जनप्रतिनिधियों और सरकार की ओर से किसानों को आश्वस्त किया गया था कि एक फसल का त्याग भविष्य में स्थायी लाभ सुनिश्चित करेगा। अब मानसून से पहले नए गेट तैयार होने से क्षेत्र के किसानों में नई उम्मीद जगी है।
तुंगभद्रा जलाशय को कर्नाटक के कोप्पल, रायचूर, बल्लारी और विजयनगर जिलों के साथ-साथ आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लाखों लोगों की जीवनरेखा माना जाता है। नए क्रेस्ट गेटों के लोकार्पण के साथ जल प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित एवं मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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