उडुपी और दक्षिण कन्नड़ में सैकड़ों स्थानों पर अब भी जरूरत
नियमों और भूमि विवादों से अटकी परियोजनाएं
उडुपी. अविभाजित दक्षिण कन्नड़ जिले में मानसून सक्रिय होने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित आवागमन के लिए जरूरी पैदल पुलों (फुटब्रिज) का निर्माण अब भी अधूरा है। बारिश के दौरान नालों, छोटी नदियों और जलधाराओं में पानी बढऩे से ग्रामीणों, विशेषकर स्कूली बच्चों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
वर्ष 2022-23 में किए गए सर्वेक्षण में उडुपी जिले में 900 से अधिक और दक्षिण कन्नड़ जिले में 400 से अधिक स्थानों पर पैदल पुलों की तत्काल आवश्यकता चिन्हित की गई थी। इसके बाद दोनों जिलों में अब तक लगभग 600 पुलों का निर्माण किया गया है, लेकिन सैकड़ों गांवों में अब भी संपर्क सुविधाओं का अभाव बना हुआ है।
हादसे के बाद हुई थी व्यापक सर्वेक्षण की शुरुआत
वर्ष 2022 में बयंदूर तालुक के कोल्लूर ग्राम में लकड़ी के पुल को पार करते समय एक बच्चा नाले में बह गया था। इस घटना के बाद दोनों जिलों के प्रशासन ने पंचायत विकास अधिकारियों के माध्यम से व्यापक सर्वेक्षण कर पुलों की आवश्यकता वाले स्थानों की सूची तैयार की थी।
नियमों में बदलाव बना बाधा
मनरेगा के तहत वर्ष 2022-23 और 2023-24 में चार से पांच लाख रुपए की लागत से पैदल पुलों के निर्माण की अनुमति थी, जिससे बड़ी संख्या में कार्य पूरे हुए। लेकिन बाद में केवल कल्वर्ट (मोरी) निर्माण की अनुमति संबंधी आदेश जारी होने के बाद नई परियोजनाएं ठप पड़ गईं। 2024-25 की कार्ययोजना में शामिल कई परियोजनाओं को भी वित्तीय स्वीकृति नहीं मिल पाई।
निजी भूमि विवाद से भी अटके काम
कई स्थानों पर निजी भूमि पर पुल निर्माण के लिए भू-स्वामियों की सहमति नहीं मिलने से परियोजनाएं शुरू नहीं हो सकी हैं। तकनीकी और कानूनी प्रक्रियाओं के कारण भी निर्माण कार्यों में देरी हो रही है।
बयंदूर मॉडल बना मिसाल
बयंदूर विधानसभा क्षेत्र में विधायक गुरुराज घंटीहोले के नेतृत्व में समृद्ध बयंदूर योजना के तहत सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल से 15 से अधिक पैदल पुलों का निर्माण किया गया है। अरुणाचलम चैरिटेबल ट्रस्ट के सहयोग से बिना सरकारी अनुदान की प्रतीक्षा किए किए गए इस प्रयास को एक आदर्श मॉडल माना जा रहा है।
400 और पैदल पुलों की आवश्यकता
लोक निर्माण विभाग द्वारा 36 पुलों का निर्माण किया जा चुका है और इसके लिए अनुदान भी प्राप्त हो गया है। जिले में अभी लगभग 400 और पैदल पुलों की आवश्यकता है तथा ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के माध्यम से इनका निर्माण सबसे उपयुक्त विकल्प है।
–स्वरूपा टी.के., जिलाधिकारी, उडुपी
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