अगले तीन महीनों में 263 गांवों में पेयजल संकट संभव
जिला पंचायत ने की टैंकर और बोरवेल की व्यवस्था
कलबुर्गी. जिले में गर्मी की तीव्रता लगातार बढऩे के साथ ही पेयजल संकट की आशंका गहराने लगी है। ‘सूर्य नगरी’ के नाम से प्रसिद्ध इस जिले में भले ही भीमा नदी, कृष्णा नदी, कगीना नदी, अमरजा नदी और करंजा नदी जैसी नदियां बहती हों, लेकिन हर वर्ष गर्मियों में ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की कमी देखने को मिलती है।
जिला पंचायत के ग्रामीण पेयजल और स्वच्छता विभाग के अनुमान के अनुसार आने वाले तीन महीनों में जिले के 263 गांवों में जल संकट उत्पन्न हो सकता है। इन गांवों में करीब 3.71 लाख लोगों की आबादी रहती है। विभाग के आकलन के अनुसार मार्च के अंत तक 102 गांवों, अप्रेल के अंत तक 94 और मई के अंत तक लगभग 90 गांवों में पेयजल संकट की स्थिति बन सकती है।
फिलहाल चित्तापुर तालुक के राजोल और डोनगांव गांवों में पेयजल की समस्या सामने आई है। राजोल में निजी बोरवेल किराए पर लेकर पानी की आपूर्ति की जा रही है, जबकि डोनगांव में सरकारी बोरवेल से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
जिले के 11 तालुकों में से आलंद तालुक में सबसे अधिक 72 गांवों में जल संकट की आशंका है। इसके अलावा कलबुर्गी तालुक के 53 और अफजलपुर तालुक के 37 गांवों में भी पानी की कमी हो सकती है।
संभावित संकट को देखते हुए जिला पंचायत ने तैयारी शुरू कर दी है। ग्रामीण पेयजल विभाग ने पांच टैंकर तैयार रखे हैं और कई बोरवेल चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें आवश्यकता पडऩे पर किराए पर लिया जाएगा। जिले में कुल 1,227 बोरवेल हैं, जिनमें से 754 कार्यशील हैं, जबकि शेष की मरम्मत की जरूरत है।
गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने को प्राथमिकता
पेयजल आपूर्ति के लिए सरकार को 6 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा गया है। साथ ही दीर्घकालिक जल समाधान के लिए केकेआरडीबी की मैक्रो योजना के तहत 17.74 करोड़ रुपए की कार्ययोजना भी तैयार की गई है। गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि गर्मियों में जलजनित बीमारियों से भी बचाव किया जा सके।
–भंवर सिंह मीणा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला पंचायत

