सिलेंडर आपूर्ति बाधित, होटल-हॉस्टल और घरों में लकड़ी से खाना
वन कटाई का खतरा बढ़ा
वन विभाग ने बढ़ाई गश्त
हावेरी. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान-इजराइल-अमरीका के बीच बढ़ते तनाव के असर से जिले में एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति में व्यवधान देखने को मिल रहा है। गैस की कमी के कारण शहरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक कई लोग फिर से लकड़ी के चूल्हों का सहारा लेने लगे हैं, जिससे जंगलों की कटाई और पर्यावरणीय नुकसान की आशंका बढ़ गई है।
वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में भारी कमी के चलते कई होटल, हॉस्टल और भोजनालयों में लकड़ी के चूल्हों पर खाना पकाया जा रहा है। वहीं, सिलेंडर नहीं मिलने के कारण कई गृहिणियां भी मजबूरी में लकड़ी के चूल्हे का उपयोग करने लगी हैं। जानकारी के अनुसार अधिकांश गैस कंपनियों के सर्वर डाउन होने के कारण मोबाइल के माध्यम से सिलेंडर बुकिंग नहीं हो पा रही है, जिससे उपभोक्ताओं को सीधे गैस एजेंसियों के पास जाना पड़ रहा है।
गैस संकट के बीच लकड़ी की मांग अचानक बढ़ गई है। आरा मिलों में बड़ी मात्रा में लकड़ी खरीदी जा रही है। इसके चलते जंगलों के आसपास तथा गांव-कस्बों में ईंधन के लिए पेड़-पौधों की कटाई बढऩे की आशंका जताई जा रही है। इस स्थिति को देखते हुए वन विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है।
उप वन संरक्षण अधिकारी अक्षय प्रकाशकर ने बताया कि जिले में करीब 45 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र है, जो कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 8.5 प्रतिशत है। जंगलों में अवैध कटाई रोकने के लिए सभी रेंज वन अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। दिन-रात गश्त बढ़ाने तथा आसपास के लोगों को जागरूक करने को कहा गया है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
इधर वाणिज्यिक सिलेंडरों की कमी के बीच बिचौलियों द्वारा 200 से 500 रुपए तक अतिरिक्त वसूली करने के आरोप भी सामने आ रहे हैं। शिकायत है कि अतिरिक्त पैसा देने वालों को प्राथमिकता से सिलेंडर दिए जा रहे हैं।
हालांकि शिक्षा विभाग का कहना है कि अक्षर दासोह (मिड-डे मील) योजना के तहत स्कूलों में फिलहाल गैस सिलेंडरों की कोई कमी नहीं है। अक्षर दासोह जिला संयोजन अधिकारी मल्लनगौड़ा पाटिल के अनुसार जिले के स्कूलों में प्रतिदिन लगभग 180 सिलेंडरों की आवश्यकता होती है और स्थानीय एजेंसियों के माध्यम से पर्याप्त आपूर्ति की जा रही है।
गैस सिलेंडरों की पर्याप्त उपलब्धता है
आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए भी फिलहाल गैस सिलेंडरों की पर्याप्त उपलब्धता है और जरूरत के अनुसार आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
–रेवती होसमठ, उपनिदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग

