तोन्टदार्य मठ ने जारी किया स्पष्टीकरण, ‘कुरआन अनुवाद’ और ‘गीता विरोध’ के आरोपों को बताया गलत
गदग. डंबल-गदग स्थित तोन्टदार्य मठ के सिद्धराम स्वामी ने कनेरी काडसिद्धेश्वर मठ के स्वामी द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें निराधार और समाज में भ्रम फैलाने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि बार-बार झूठे आरोप लगाकर सामाजिक अशांति पैदा करने की कोशिश की जा रही है।
इस संबंध में जारी बयान में सिद्धराम स्वामी ने कहा कि हाल ही में बागलकोट जिले के रबकवी-बनहट्टी में कनेरी स्वामी द्वारा लगाए गए आरोप सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें यह कहा गया कि तोन्टदार्य मठ ने मराठी कुरआन का कन्नड़ में अनुवाद कर प्रकाशित किया और भागवद गीता का विरोध किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मठ ने किसी कुरआन का अनुवाद नहीं किया है, बल्कि विनोबा भावे की ‘इस्लाम धर्म संदेश’ नामक हिंदी कृति का अनुवाद किया गया था, जो कुरआन नहीं है। साथ ही, इस पुस्तक का प्रकाशन भी मठ से नहीं किया गया।
सिद्धराम स्वामी ने कहा कि भागवद गीता के अपमान का आरोप पूरी तरह से असत्य है। उन्होंने दावा किया कि मठ ने भारतीय दर्शन ग्रंथों में गीता के अंशों का सम्मानपूर्वक अनुवाद किया है और कई धार्मिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान किसी व्यक्ति की छवि खराब करने और विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने के उद्देश्य से दिए जा रहे हैं।
स्वामी ने कहा कि यह तीसरी बार है जब इस प्रकार के आरोप लगाए गए हैं और लोगों को ऐसे भ्रामक दावों पर विश्वास नहीं करना चाहिए।

