दाखिले से पहले किताबों की मांग पर सवाल
पीयू कॉलेजों में बढ़ी परेशानी
सरकार ने 10 अप्रेल तक मांगी पुस्तकों की संख्या
शिक्षकों ने कहा – बिना प्रवेश सूची कैसे दें आंकड़े
बंटवाल (दक्षिण कन्नड़). इस वर्ष से सरकार द्वारा निजी सहित सभी प्री-यूनिवर्सिटी (पीयू) कॉलेजों के विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकें वितरित करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत शिक्षा विभाग ने कॉलेजों को आवश्यक पुस्तकों की संख्या 10 अप्रेल तक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, इस आदेश ने शिक्षकों के सामने नई समस्या खड़ी कर दी है।
प्रवेश से पहले आंकड़े देना चुनौती
शिक्षकों का कहना है कि एसएसएलसी (10वीं) के परिणाम अप्रेल के अंत तक घोषित होने की संभावना है। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कितने छात्र पीयू कॉलेजों में प्रवेश लेंगे। ऐसे में अभी छात्रों की संख्या तय किए बिना पुस्तकों की मांग का आंकड़ा देना व्यावहारिक नहीं है।
विभाग के निर्देशों पर उठे सवाल
कई शिक्षकों ने सवाल उठाया है कि जब तक दाखिला प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक पाठ्यपुस्तकों की सटीक आवश्यकता बताना संभव नहीं है। यदि किताबें अधिक आ गईं या कम पड़ गईं, तो उसके लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था भी नहीं बताई गई है।
पुराने पुस्तकों के उपयोग की संभावना
अधिकांश छात्र पिछले वर्ष के विद्यार्थियों से किताबें प्राप्त कर लेते हैं, जिससे नई पुस्तकों की आवश्यकता कम हो जाती है। इसके बावजूद कुल पुस्तकों के 25 प्रतिशत की राशि स्कूलों से वसूलने की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई जा रही है।
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