कैदियों की सेहत पर खतरा
स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर जताई पीड़ा
प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
हावेरी. हावेरी के जिला कारागार में दवाइयों की गंभीर कमी सामने आई है, जिससे कैदियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। आवश्यक दवाएं समय पर उपलब्ध न होने से परेशान बंदियों ने स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर अपनी व्यथा व्यक्त की है।
दवाओं की कमी से बढ़ी परेशानी
शहर से करीब 8 किलोमीटर दूर केरिमट्टीहल्ली स्थित इस जेल में वर्तमान में 195 कैदी बंद हैं। इनमें कई कैदी उच्च रक्तचाप, मधुमेह समेत विभिन्न बीमारियों से पीडि़त हैं, लेकिन उन्हें आवश्यक दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। आश्चर्य की बात यह है कि जिला अस्पताल नजदीक होने के बावजूद दवाएं 18 किलोमीटर दूर ब्याडगी तालुक अस्पताल से मंगाने का निर्देश है, जहां पर्याप्त दवाएं उपलब्ध नहीं हैं।
कैदियों की पीड़ा और मांग
एक बंदी ने बताया कि “मैं उच्च रक्तचाप का मरीज हूं और रोज दवा लेनी होती है, लेकिन यहां पर्याप्त गोलियां नहीं मिलतीं। पूछने पर अधिकारी आपूर्ति न होने की बात कहते हैं।” कैदियों ने मांग की है कि दवा आपूर्ति का नियम बदलकर सीधे जिला अस्पताल से दवाएं उपलब्ध कराई जाएं।
स्वास्थ्य मंत्री को पत्र
आम आदमी पार्टी के नेता एमएन. नायक ने इस मुद्दे पर स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडूराव को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ब्याडगी अस्पताल और जिला स्वास्थ्य अधिकारियों की लापरवाही के कारण दवाओं की आपूर्ति बाधित हो रही है, जिससे कैदियों के जीवन पर खतरा मंडरा रहा है।
जिला कारागार अधीक्षक वाईडी. नागरत्नम्मा ने बताया कि हमारे कर्मचारी स्वयं ब्याडगी जाकर दवाएं लाते हैं, लेकिन वहां भी पर्याप्त दवाएं नहीं मिल रही हैं। इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दी गई है।
मूलभूत सुविधाओं का अभाव
करीब दो दशक पुराने इस कारागार में स्थायी डॉक्टर, नर्स और एंबुलेंस जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। कैदियों को अस्पताल ले जाने के लिए निजी वाहन का सहारा लेना पड़ता है। सप्ताह में केवल दो दिन विजिटिंग डॉक्टर आते हैं, वह भी सीमित समय के लिए।
अन्य समस्याएं भी गंभीर
कारागार में 12 पद रिक्त हैं, जिससे व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। वहीं, काम करने वाले बंदियों को दिसंबर 2025 से मानदेय भी नहीं मिला है।
इस पूरे मामले ने जेल प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
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