हुब्बल्ली में 12वें मई साहित्य मेले का शुभारंभहुब्बल्ली में 12वें मई साहित्य मेले का शुभारंभ करते गणमान्य।

“संवैधानिक लोकतंत्र पर हमला” विषय पर मंथन, संविधान बचाने का आह्वान

हुब्बल्ली. 12वां मई साहित्य मेला का शुभारंभ शनिवार को शहर के आर.एन. शेट्टी कल्याण मंडप में हुआ। इस वर्ष मेले का मुख्य विषय “संवैधानिक लोकतंत्र पर हमला : स्वरूप और विकल्प” रखा गया है।

कार्यक्रम की शुरुआत संविधान की प्रस्तावना के वाचन से हुई। इसके बाद सिंधनूर की आरसीएफ कला टीम, कोप्पल की धरनी कला टीम, गदग की दलित कला मंडली सहित विभिन्न सांस्कृतिक समूहों ने संघर्ष गीत प्रस्तुत किए।

यह साहित्य मेला लड़ाई प्रकाशन, चित्तार कला बलग, कवि प्रकाशन तथा मई साहित्य मेला हुब्बल्ली समूह के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया है।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए पत्रकार सनतकुमार बेलगली ने कहा कि कुछ शक्तियां लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर मनुवादी राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। संसदीय लोकतंत्र और सहअस्तित्व में विश्वास रखने वाली सभी शक्तियों को एकजुट होकर इसका विरोध करना चाहिए।

तेलुगु साहित्यकार पाणी ने कहा कि संघर्ष ही समाज की नई परिभाषा बन गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाज में जातीय विभाजन पैदा कर सांस्कृतिक हथियारों के माध्यम से सामाजिक सौहार्द बिगाडऩे की कोशिश की जा रही है।

प्रो. आई.जी. सनदी ने कहा कि प्रतिभा केवल विशेष वर्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि मिट्टी से जुड़े लोगों में भी अपार क्षमता है। उन्होंने साहित्य और संस्कृति के माध्यम से अन्याय के खिलाफ संघर्ष की भावना मजबूत करने का आह्वान किया।

इस दौरान “हुब्बल्ली घोषणा” जारी की गई तथा साहित्यकार पाणी के उपन्यास “शिकारी” का लोकार्पण भी हुआ। कार्यक्रम से पहले रेवरेण्ड जॉर्ज फर्डिनैंड किट्टेल, फ.गु. हलकट्टी, जगदीश मंगलूरमठ, प्रल्हाद अगसनकट्टे और जी.एच. राघवेंद्र स्मृति पुस्तक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया।

मेले में सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक मुद्दों से जुड़े नौ प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। इनमें एसआईआर प्रक्रिया के माध्यम से दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के नागरिक अधिकारों पर कथित हस्तक्षेप का विरोध, कन्नड़ प्राथमिक स्कूलों को बंद करने के फैसले का विरोध, घुमंतू समुदायों के लिए आरक्षण, किसान विरोधी कानूनों की वापसी, राज्य में द्विभाषा नीति लागू करने और हिंदी थोपने का विरोध शामिल रहा।

इसके अलावा, “कोप्पल बचाओ” आंदोलन के समर्थन तथा रात 7 बजे के बाद सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक जुलूसों और डीजे उपयोग पर रोक लगाने की मांग भी उठाई गई।

 

हुब्बल्ली में 12वें मई साहित्य मेले का शुभारंभ
हुब्बल्ली में 12वें मई साहित्य मेले में भाग लेते लोग।

कार्यक्रम में के. नीला, अनवर मुधोल, गुरुनाथ उल्लिकाशी, महेश पत्तार सहित कई साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी उपस्थित थे।

Breaking News सबसे पहले पाना चाहते हैं?

अभी हमारे WhatsApp Channel को join करें

हर खबर सबसे पहले

Join करें : https://whatsapp.com/channel/0029Vb7S2RA65yD9fZX4Og1Z

Spread the love

By Bharat Ki Awaz

मैं भारत की आवाज़ हिंदी न्यूज़ पोर्टल से जुड़ा हुआ हूँ, जहाँ मेरा उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और ताज़ा ख़बरें पहुँचाना है। राजनीति, समाज, संस्कृति और स्थानीय मुद्दों पर गहरी रुचि रखते हुए मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि समाचार केवल सूचना न हों, बल्कि पाठकों को सोचने और समझने का अवसर भी दें। मेरी लेखनी का मक़सद है—जनता की आवाज़ को मंच देना और देश-समाज से जुड़े हर पहलू को ईमानदारी से प्रस्तुत करना। भारत की आवाज़ के माध्यम से मैं चाहता हूँ कि पाठक न केवल ख़बरें पढ़ें, बल्कि उनसे जुड़ाव महसूस करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *