अंकोला के हारवाड़ गांव में तेज कटाव से दहशत
दो परिवारों ने घर खाली किए, स्थायी सुरक्षा दीवार की मांग तेज
अंकोला (उत्तर कन्नड़). उत्तर कन्नड़ जिले के अंकोला तालुक के हारवाड़ गांव के तरंगमेट क्षेत्र में समुद्र का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। तेज हवा और मूसलाधार बारिश के बीच समुद्र में उठी विशाल लहरें तट को पार कर रिहायशी इलाके तक पहुंच गईं। लगातार हो रहे तटीय कटाव से ग्रामीणों में भय का माहौल है और कई वर्षों से जताई जा रही उनकी आशंकाएं अब वास्तविकता में बदलती नजर आ रही हैं।
घरों तक पहुंचा समुद्री कटाव
समुद्र की ऊंची लहरें लगातार तटवर्ती भूमि का कटाव कर रही हैं। कई नारियल के पेड़ समुद्र में समा चुके हैं और जमीन का हिस्सा भी तेजी से कट रहा है। लहरें घरों के आंगन तक पहुंचने लगी हैं, जिससे लोग हर पल अनहोनी की आशंका के बीच जीवन बिताने को मजबूर हैं।
दो परिवारों ने छोड़े अपने घर
खतरे को देखते हुए दो परिवार अपने मकान खाली कर रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं। अन्य परिवार भी भय के साए में रह रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समुद्र का यही रौद्र रूप जारी रहा तो कई मकान समुद्र में समा सकते हैं।
मछुआरा समुदाय पर गहराया संकट
मछली पकडऩे पर निर्भर स्थानीय लोगों के लिए समुद्र ही आजीविका का प्रमुख साधन है। लेकिन वही समुद्र अब उनकी जमीन, घर और वर्षों की मेहनत से बसाई गई जिंदगी के लिए खतरा बन गया है। लगातार हो रहे कटाव से ग्रामीणों में भविष्य को लेकर गहरी चिंता व्याप्त है।
स्थायी सुरक्षा उपाय की मांग
घटना की जानकारी मिलने पर ग्राम पंचायत के अधिकारियों ने क्षेत्र का निरीक्षण किया। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि अस्थायी उपाय पर्याप्त नहीं हैं। उनका आरोप है कि वर्षों से समुद्री तट पर स्थायी सुरक्षा दीवार (सी-वॉल) बनाने की मांग की जा रही है, लेकिन जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों की अनदेखी के कारण स्थिति लगातार गंभीर होती गई।
ग्रामीणों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर तटीय सुरक्षा दीवार का निर्माण, खतरे वाले परिवारों का सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास तथा उचित मुआवजा देने की मांग की है।
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