कहीं बाढ़ जैसे हालात, कहीं सूखे की चिंता
मलनाड-तटीय क्षेत्र में झमाझम बारिश से जलाशय लबालब होने लगे, उत्तर कर्नाटक में किसानों को राहत की आस; आलमट्टी में शुरू हुई जल आवक
हुब्बल्ली. कर्नाटक में दक्षिण-पश्चिम मानसून अब दो अलग-अलग तस्वीरें पेश कर रहा है। एक ओर तटीय और मलनाड क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से नदियां उफान पर हैं, जलाशयों में तेजी से पानी की आवक बढ़ रही है और कई स्थानों पर जनजीवन प्रभावित हुआ है। वहीं दूसरी ओर उत्तर कर्नाटक के कई जिलों में जून भर कमजोर रहे मानसून के कारण सूखे जैसे हालात बने रहे। हालांकि महाराष्ट्र के महाबलेश्वर और पश्चिमी घाट के जलग्रहण क्षेत्रों में तेज बारिश के बाद अब कृष्णा बेसिन के प्रमुख जलाशयों में पानी पहुंचना शुरू हो गया है, जिससे किसानों और सिंचाई परियोजनाओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
आलमट्टी में शुरू हुई मानसून की पहली आवक
करीब दो माह की प्रतीक्षा के बाद सोमवार को आलमट्टी के लाल बहादुर शास्त्री जलाशय में इस वर्ष मानसून के पानी की पहली आवक दर्ज की गई। प्रारंभिक चरण में 1,239 क्यूसेक पानी जलाशय में पहुंचा है। अधिकारियों का कहना है कि महाराष्ट्र के कोयना, नवजा और महाबलेश्वर क्षेत्र में हो रही भारी बारिश के कारण अगले दो-तीन दिनों में जल आवक कई गुना बढ़ सकती है। इससे आगे नारायणपुर (बसवसागर) तथा तुंगभद्रा जलाशय में भी पानी पहुंचने की संभावना है।

जलाशयों में बढ़ी रौनक, कई नदियां उफान पर
शिवमोग्गा का तुंगा जलाशय इस मानसून में सबसे पहले भर गया है, जिसके बाद उसके क्रेस्ट गेट खोलकर हजारों क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा गया। भद्रा, लिंगनमक्की, कबिनी, घटप्रभा, मलप्रभा और सिंगटालूर बैराज में भी जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। बेलगावी और चिक्कोडी क्षेत्र में कृष्णा, दूधगंगा, वेदगंगा और घटप्रभा नदियों के उफान पर आने से सात निम्न स्तरीय पुल जलमग्न हो गए हैं। हालांकि वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होने से यातायात पूरी तरह बाधित नहीं हुआ है।
मलनाड में बारिश का कहर
चिक्कमगलूरु, उत्तर कन्नड़, कोडगु और हासन जिलों में लगातार हो रही तेज बारिश और आंधी से कई स्थानों पर पेड़ उखड़ गए, मकानों को नुकसान पहुंचा तथा भूस्खलन की आशंका बढ़ गई है। एहतियातन चिक्कमगलूरु जिले के मूडिगेरे तालुक में आंगनबाड़ी केंद्रों और प्राथमिक विद्यालयों में अवकाश घोषित किया गया है।
उत्तर कर्नाटक में अब भी सूखे की मार
इसके विपरीत, यादगीर, विजयपुर और आसपास के जिलों में जून भर पर्याप्त बारिश नहीं होने से खरीफ फसलों पर संकट गहरा गया है। यादगीर में लगभग 45 प्रतिशत बुवाई हो चुकी है, लेकिन बारिश के अभाव में कपास, अरहर और मूंग की फसलें प्रभावित होने लगी हैं। किसान महंगे बीज और उर्वरक खरीद चुके हैं तथा सरकार से जिले को सूखाग्रस्त घोषित कर राहत पैकेज देने की मांग कर रहे हैं।
राहत और चुनौती साथ-साथ
मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी घाट और महाराष्ट्र के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला जारी रहने पर कृष्णा बेसिन के जलाशयों में जलसंग्रह तेजी से बढ़ेगा। इससे सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन को राहत मिलेगी। वहीं उत्तर-पूर्वी कर्नाटक के बारिश-आश्रित इलाकों में अच्छी बारिश अभी भी किसानों की सबसे बड़ी जरूरत बनी हुई है।
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