मैसूरु में संगीत शोध एवं प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जाए स्मारक
हावेरी. पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद बसवराज बोम्मई ने महान पाश्र्व गायिका एस. जानकी की स्मृति में मैसूरु में एक भव्य और आधुनिक स्मारक बनाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यद्यपि एस. जानकी आज शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके गीत और संगीत उन्हें हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रखेंगे।
संगीत जगत को दिया अमूल्य योगदान
हावेरी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बोम्मई ने कहा कि एस. जानकी ने पांच दशक से अधिक समय तक संगीत जगत की सेवा की। उन्होंने कन्नड़, तमिल, तेलुगु सहित 17 भाषाओं में 40 हजार से अधिक गीत गाकर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उनके द्वारा गाए गए लगभग सभी गीत आज भी लोकप्रिय हैं और संगीत प्रेमियों की पहली पसंद बने हुए हैं।
स्वर परिवर्तन उनकी सबसे बड़ी पहचान
बोम्मई ने कहा कि एस. जानकी की आवाज में अद्भुत विविधता थी। वह छोटे बच्चे से लेकर वृद्ध व्यक्ति तक की आवाज का प्रभाव पैदा करने में सक्षम थीं। यही उनकी सबसे बड़ी विशेषता थी। उन्होंने उन्हें संगीत की देवी सरस्वती का स्वरूप बताते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
स्मारक बने प्रेरणा का केंद्र
उन्होंने कहा कि एस. जानकी का मैसूरु से विशेष लगाव था। उनकी इच्छा थी कि जीवन के अंतिम दिन मैसूरु में बिताएं और अंतिम संस्कार भी वहीं हो। यह कर्नाटक और कन्नड़ संस्कृति के प्रति उनके गहरे प्रेम का प्रतीक है।
बोम्मई ने सुझाव दिया कि मैसूरु में बनने वाले स्मारक में उनके गीतों का संग्रह, उनके गायन पर शोध की सुविधा तथा संगीत सीखने के इच्छुक युवा कलाकारों के लिए प्रशिक्षण और प्रेरणा केंद्र भी स्थापित किया जाए, ताकि आने वाली पीढिय़ां उनके संगीत से प्रेरणा ले सकें।
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