मेंगलूरु में प्रॉपर्टी कार्ड व्यवस्था बंद, 75 हजार कार्ड प्रभावितप्रॉपर्टी कार्ड।

इ-खाता ही होगा संपत्ति का प्रमुख दस्तावेज

कृषि भूमि को सीमित छूट

मेंगलूरु। सभी संपत्ति संबंधी जानकारी वाला सुव्यवस्थित दस्तावेज माने जाने वाले शहरी संपत्ति स्वामित्व रिकॉर्ड (यूपीओआर)-प्रॉपर्टी कार्ड की व्यवस्था राज्य सरकार ने मेंगलूरु में बंद कर दी है। इससे शहर में पहले जारी किए गए करीब 75 हजार प्रॉपर्टी कार्ड अब लेन-देन के लिए निष्क्रिय हो गए हैं। भविष्य में नागरिकों को सामान्य गैर-कृषि संपत्तियों के लिए प्रॉपर्टी कार्ड बनवाने की आवश्यकता भी नहीं होगी।

यूपीओआर यानी सिटी सर्वे व्यवस्था मेंगलूरु में वर्ष 2009 से लागू थी। यह व्यवस्था शिवमोग्गा, मैसूरु, हुब्बल्ली-धारवाड़ और बल्लारी में भी लागू है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फिलहाल इसे केवल मेंगलूरु में बंद किया गया है।

इ-खाता ही अंतिम दस्तावेज

राज्य में अब शहरी स्थानीय निकायों के दायरे में आने वाली सभी संपत्तियों के लिए इ-खाता अनिवार्य किया गया है। संपत्ति के पंजीकरण के लिए भी इ-खाता का उपयोग अनिवार्य है। इ-खाता के तहत संपत्तियों को ए या बी खाता दिया जाता है। ऐसे में एक ही संपत्ति के लिए यूपीओआर, पहणी और इ-खाता जैसे अलग-अलग दस्तावेज रखने से दोहरे पंजीकरण और धोखाधड़ी की आशंका रहती है। इसी को देखते हुए सरकार ने एक संपत्ति के लिए एक ही प्रमुख दस्तावेज रखने का निर्णय लिया है।

सिस्टम में भी हुआ ब्लॉक, प्रिंट निकालना मुश्किल

पहले शहर में जारी किए गए प्रॉपर्टी कार्ड का विवरण यूपीओआर सॉफ्टवेयर में उपलब्ध था। व्यवस्था बंद होने के बाद इन विवरणों को सॉफ्टवेयर में भी ब्लॉक कर दिया गया है। अब पुराने प्रॉपर्टी कार्ड की दोबारा प्रति निकालने के लिए यूपीओआर कार्यालय पहुंचने पर भी विवरण सिस्टम में दिखाई नहीं देता, इसलिए प्रिंट निकालना संभव नहीं है।

यूपीओआर कार्यालय के एक कर्मचारी के अनुसार, पहले मूडा की ओर से भी स्केच या सीमा-चिह्न नक्शे की आवश्यकता होने पर लोगों को यूपीओआर कार्यालय भेजा जाता था। अब यह सुविधा भी बंद हो गई है। संपत्ति पंजीकरण इ-खाता के माध्यम से हो रहा था, जबकि प्रॉपर्टी कार्ड में म्यूटेशन की सुविधा भी उपलब्ध थी। अब यह सुविधा भी नहीं मिल रही है। सीमा विवाद से संबंधित नक्शे के लिए आने वाले नागरिकों को भी अब यह सुविधा उपलब्ध कराना संभव नहीं है।

फिलहाल केवल कृषि भूमि के लिए प्रॉपर्टी कार्ड

अब केवल उन्हीं जमीनों के लिए प्रॉपर्टी कार्ड जारी किया जा सकता है, जिनके पहणी रिकॉर्ड में कृषि भूमि दर्ज है और जमीन पर वास्तविक रूप से कृषि गतिविधि भी हो रही है। इसके लिए सर्वेक्षण के बाद भूमि मापन उपनिदेशक के बेंगलूरु कार्यालय को पत्र भेजना होगा। इसके बाद संबंधित ब्लॉक और चालू प्रक्रिया को सॉफ्टवेयर में खोला जाएगा और तभी उस जमीन से संबंधित प्रॉपर्टी कार्ड जारी किया जा सकेगा। हालांकि, शहर की सीमा में कृषि भूमि बहुत कम है।

सरकार के आदेश में क्या बदलाव?

सरकार ने 4 जून को जारी आदेश में यूपीओआर व्यवस्था के संबंध में दिशा-निर्देश दिए हैं कि शहर की सीमा में आने वाले यूपीओआर के अंतर्गत 37 गांवों की भूमि के सॉफ्टवेयर में दर्ज पहणी को लेन-देन के उद्देश्य से निष्क्रिय किया जाएगा।
पहले शहरीकरण वाली संपत्तियों और कृषि संपत्तियों को जारी किए गए यूपीओआर कार्ड भी लेन-देन के लिए निष्क्रिय रहेंगे।
37 गांवों में जिन जमीनों का स्वरूप और रिकॉर्ड में कब्जा कृषि का है तथा जिन्हें ए या बी खाता नहीं दिया जा सकता, उन्हीं के पूर्ण या आंशिक क्षेत्रफल के लिए यूपीओआर सॉफ्टवेयर में प्रॉपर्टी कार्ड जारी किया जा सकेगा।
कृषि भूमि के पंजीकरण के लिए कावेरी सॉफ्टवेयर को यूपीओआर सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाएगा और यूपीओआर कार्ड की जानकारी के आधार पर पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

इ-खाता ही अनिवार्य

दक्षिण कन्नड़ के डीडीएलआर पुष्पराज ने कहा कि सरकार ने संपत्तियों के लिए इ-खाता अनिवार्य कर दिया है। इसलिए सभी गैर-कृषि भूमि के लिए प्रॉपर्टी कार्ड की व्यवस्था बंद करने का आदेश दिया गया है। शहर के दायरे में आने वाले 37 गांव भी मास्टर प्लान क्षेत्र में हैं और अधिकांश इलाके शहरीकरण की चपेट में आ चुके हैं। पहणी, इ-खाता और प्रॉपर्टी कार्ड जैसे कई दस्तावेज होने के कारण अब इ-खाता को ही अनिवार्य किया गया है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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