नक्सल के बाद अब कस्तूरीरंगन रिपोर्ट की चिंतानक्सल के बाद अब कस्तूरीरंगन रिपोर्ट की चिंता

हेब्री के कब्बिनाले में ग्रामीणों को विकास, भूमि अधिकार और खेती प्रभावित होने का डर

हेब्री (उडुपी)। कभी नक्सली गतिविधियों के कारण सुर्खियों में रहा उडुपी जिले के हेब्री तालुक का कब्बिनाले गांव अब कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट लागू होने की आशंका से चिंतित है। ग्रामीणों का कहना है कि नक्सली भय से पूरी तरह उबर भी नहीं पाए थे कि अब पर्यावरण संबंधी प्रतिबंधों की चिंता सामने खड़ी हो गई है।

मुद्राडी ग्राम पंचायत के अंतर्गत कब्बिनाले के आसपास तथा हेब्री ग्राम पंचायत क्षेत्र के दुर्गा और सांतोल्ली के आसपास के इलाके कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के दायरे में बताए जा रहे हैं।

विकास कार्यों पर असर की आशंका

ग्रामीणों के अनुसार, कब्बिनाले क्षेत्र में सडक़, पुल, पेयजल, मोबाइल संपर्क और पर्यटन सुविधाओं की पहले से कमी है। यदि नए विकास कार्यों के लिए कठोर पर्यावरणीय मंजूरी अनिवार्य हुई तो क्षेत्र के विकास की गति और धीमी हो सकती है।

क्षेत्र में मले-कुडिया समुदाय समेत अनेक वन सीमावर्ती परिवार अब भी भूमि अधिकार-पत्र की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि 90 प्रतिशत से अधिक लोगों को अभी पूर्ण भूमि दस्तावेज नहीं मिले हैं। ऐसे में रिपोर्ट लागू होने पर भूमि अधिकार का भविष्य और अनिश्चित होने की आशंका जताई जा रही है।

मत्तावु पुल का सपना अधूरा

नक्सली गतिविधियों से प्रभावित मत्तावु क्षेत्र में नदी के दूसरी ओर रहने वाले 15 से अधिक परिवार आज भी आवागमन की समस्या झेल रहे हैं। ग्रामीणों ने नदी पर स्वयं अस्थायी पैदल पुल बनाया है। पुल निर्माण के लिए अनुदान स्वीकृत होने के बावजूद वन विभाग की आपत्तियों के कारण काम शुरू नहीं हो सका। ग्रामीणों को आशंका है कि कस्तूरीरंगन रिपोर्ट लागू होने के बाद यह पुल और दूर का सपना बन सकता है।

पर्यटन और खेती को लेकर भी चिंता

कब्बिनाले अपनी प्राकृतिक सुंदरता और वर्षाकालीन जलप्रपातों के लिए प्रसिद्ध है। ग्रामीणों का कहना है कि पर्यावरणीय क्षेत्र के नियम कड़े होने पर पर्यटन गतिविधियों और बुनियादी सुविधाओं के विकास पर असर पड़ सकता है।

वन्यजीवों के कारण धान की खेती करना भी कठिन हो गया है और कई परिवार सुपारी की खेती पर निर्भर हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि कीटनाशकों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा तो सुपारी की खेती प्रभावित होगी।

ग्रामीणों ने सरकार से ग्रामसभा के माध्यम से स्थानीय लोगों की राय लेने, भौतिक सर्वेक्षण कराने और आबादी वाले क्षेत्रों को पर्यावरणीय दायरे से बाहर रखने की मांग की है। उनका कहना है कि पर्यावरण संरक्षण जरूरी है, लेकिन पीढिय़ों से यहां रह रहे लोगों के जीवन, भूमि अधिकार और विकास के अधिकार की भी समान रूप से रक्षा होनी चाहिए।

मले-कुडिया संघ के जिलाध्यक्ष गंगाधर गौड़ा ने कहा कि पहले भूमि अधिकार-पत्र और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
कब्बिनाले निवासी श्रीकर भारद्वाज ने रिपोर्ट की पूरी जानकारी ग्रामीणों को देने की मांग की।
किसान सुब्रह्मण्य कंगिनाय ने कहा कि प्रतिबंधों से सुपारी की खेती प्रभावित होने पर किसानों की आजीविका संकट में पड़ सकती है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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