बच्चों के पैरों में घटिया जूते पहनाने की तैयारी!बीइओ कार्यालय में रखे गए जूतों के बक्से।

हुविनहडग़ली में सरकारी स्कूलों के 19,400 जोड़ी जूते अटके; विधायक ने वितरण रुकवाया

विधायक बोले—गुणवत्ता से समझौता नहीं, विधानसभा में उठाएंगे मामला; बीइओ ने भी माना, जूते वितरित नहीं किए गए

हुविनहडग़ली (विजयनगर)। सरकारी स्कूलों के बच्चों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए चलाई जा रही विद्याविकास योजना में कथित तौर पर घटिया गुणवत्ता के जूते-सॉक्स की आपूर्ति का मामला सामने आया है। गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए हुविनहडग़ली के विधायक कृष्णा नायक ने अधिकारियों को इन जूतों का विद्यार्थियों में वितरण नहीं करने के निर्देश दिए हैं।

योजना के तहत कक्षा 1 से 10 तक के विद्यार्थियों को एक जोड़ी जूते और दो जोड़ी सॉक्स दिए जाते हैं। इस बार राज्य स्तर पर टेंडर प्रक्रिया पूरी करने के बाद विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर संबंधित तालुक के शिक्षा विभाग को जूते-सॉक्स भेजे गए हैं।

हुविनहडग़ली तालुक में 140 सरकारी प्राथमिक और 27 सरकारी माध्यमिक विद्यालय हैं। इनमें करीब 19,700 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इसी आधार पर करीब 19,400 यूनिट जूते पिछले सप्ताह क्षेत्र शिक्षा अधिकारी (बीइओ) कार्यालय पहुंचाए गए।

वितरण कार्यक्रम के लिए अधिकारियों ने विधायक को आमंत्रित किया था। जूतों का निरीक्षण करने के बाद विधायक ने उनकी गुणवत्ता पर सवाल उठाए और अधिकारियों से वितरण रोकने को कहा। उन्होंने कहा कि इसी मामले को लेकर अन्य स्थानों पर लोकायुक्त ने स्वत: संज्ञान लेकर शिकायत दर्ज की है। उन्होंने सरकार का ध्यान विधानसभा में भी इस मुद्दे की ओर आकर्षित करने की बात कही।

बीइओ कार्यालय बना गोदाम

बीइओ कार्यालय में जूतों के बक्से रखे जाने से पूरा कार्यालय ही गोदाम जैसा नजर आ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में रखे जूतों से निकलने वाली दुर्गंध के कारण काम करना मुश्किल हो रहा है।

बीइओ के. मंगला ने कहा कि जूते-सॉक्स पिछले सप्ताह पहुंचे हैं, लेकिन विभाग को आधिकारिक रूप से हस्तांतरित नहीं किए गए हैं। गुणवत्ता को लेकर विधायक के निर्देश के बाद इन्हें स्कूलों में वितरित नहीं किया गया है।

पिछले साल लिबर्टी के जूते

विधायक कृष्णा नायक ने कहा कि पिछले वर्ष तालुक के सरकारी स्कूलों के बच्चों को लिबर्टी कंपनी के जूते वितरित किए गए थे। इस बार भी उसी स्तर की गुणवत्ता वाले जूते उपलब्ध कराए जाने चाहिए। सरकारी स्कूल के बच्चों के मामले में गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और वे इस विषय को विधानसभा में उठाएंगे।

 

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By Bharat Ki Awaz

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