घोषणा के एक साल बाद भी 5 लाख रुपए की स्वास्थ्य संजीवनी लागू नहीं
हुब्बल्ली। राज्य में राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान (एनएचएम) सहित विभिन्न विभागों के करीब 3 लाख संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए घोषित स्वास्थ्य बीमा योजना अब तक लागू नहीं हो सकी है। सरकार ने पिछले बजट में कर्मचारियों को सालाना 5 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराने की घोषणा की थी, लेकिन तकनीकी अड़चनों के कारण योजना का लाभ कर्मचारियों को नहीं मिल पा रहा है।
इलाज का खर्च, परिवार पर बोझ
उत्तर कर्नाटक के एक एनएचएम कर्मचारी के गैंगरीन से पीडि़त होने के बाद अस्पताल में भर्ती होने का मामला सामने आया है। इलाज पर करीब 4 लाख रुपए खर्च होने से परिवार आर्थिक संकट में है। कर्मचारियों का कहना है कि योजना लागू होती तो ऐसे मामलों में बड़ी राहत मिल सकती थी।
राज्य में करीब 30 हजार एनएचएम कर्मचारी चिकित्सक, आयुष चिकित्सक, नर्सिंगकर्मी तथा प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों सहित विभिन्न स्तरों पर सेवाएं दे रहे हैं।
पंजीयन प्रक्रिया भी अटकी
सरकार ने कर्नाटक स्वास्थ्य संजीवनी योजना-एनपीइ को सुवर्ण आरोग्य सुरक्षा ट्रस्ट के माध्यम से लागू करने का निर्णय लिया था। प्रस्ताव के अनुसार कर्मचारियों से वेतन के आधार पर 100 और 140 रुपए तथा सरकार की ओर से 200 रुपए मासिक अंशदान किया जाना था।
लेकिन डीडीओ कोड के आधार पर पंजीयन में तकनीकी समस्या आने से प्रक्रिया रुक गई है। कर्मचारियों के वेतन से अंशदान भी नहीं कट रहा और सरकार का हिस्सा भी जमा नहीं हो रहा। कर्मचारी संगठनों ने जिला स्तर पर पंजीयन शुरू कर योजना तत्काल लागू करने की मांग की है।
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