71 लोगों की जान बचाई, 4 हजार नॉटिकल मील की गश्त
मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के अभियानों में भी निभाई अहम भूमिका
कारवार। समुद्री सुरक्षा और निगरानी में करीब दो दशक तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली भारतीय तटरक्षक बल की गश्ती नौका सावित्रीबाई फुले शनिवार, 19 सितंबर को सेवानिवृत्त हो गई। कारवार के वाणिज्यिक बंदरगाह स्थित तटरक्षक बल के जेट्टी पर सूर्यास्त के समय नौका का ध्वज उतारकर औपचारिक रूप से उसे सेवा से विदाई दी गई।
सरोजिनी नायडू श्रेणी की तेज गति वाली यह गश्ती नौका 50.44 मीटर लंबी और 7.51 मीटर चौड़ी थी। करीब 270 टन वजनी नौका में 2,720 किलोवाट क्षमता का डीजल इंजन लगा था और यह अधिकतम 35 नॉटिकल मील प्रति घंटे की गति से चल सकती थी।
71 लोगों की बचाई जान
नौका के कमांडिंग अधिकारी गौरव श्रीवास्तव ने सूर्यास्त के समय नौका का ध्वज उतारकर उसे कांच के बॉक्स में सुरक्षित रखा और तटरक्षक बल के उपमहानिरीक्षक प्रवीण कुमार मिश्रा को सौंपा। इसके साथ ही सावित्रीबाई फुले की सेवा का औपचारिक समापन हुआ।
श्रीवास्तव के अनुसार, नौका ने अपने सेवाकाल में करीब 4 हजार नॉटिकल मील की दूरी तय की और 71 लोगों के बचाव अभियानों में हिस्सा लिया। समुद्री मार्ग से मादक पदार्थों की तस्करी का पता लगाने के अभियानों में भी नौका का इस्तेमाल किया गया।
उपमहानिरीक्षक प्रवीण कुमार मिश्रा ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी सावित्रीबाई फुले ने तटरक्षक बल के अभियानों को मजबूती दी। लगातार समुद्री गश्त के जरिए यह संकट में फंसे लोगों के लिए भरोसे की किरण बनी रही।
जनवरी तक कारवार पहुंचेगी आइसीजीएस पराग
सावित्रीबाई फुले के स्थान पर आइसीजीएस पराग गश्ती नौका को जनवरी तक कारवार लाने की तैयारी है। मिश्रा के अनुसार, फिलहाल तीन अन्य गश्ती नौकाएं भी कारवार में तैनात हैं।
उन्होंने कहा कि अमदल्ली में तटरक्षक बल का कार्यालय भी शुरू किया जा रहा है। वाणिज्यिक बंदरगाह की 150 मीटर जेट्टी सरकार ने तटरक्षक बल को उपलब्ध कराई है। फिलहाल नई जेट्टी बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। समारोह में तटरक्षक बल के वरिष्ठ अधिकारी अखिल यादव सहित केंद्र सरकार और विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
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