बारिश रूठी, कीटों ने उजाड़ी खेतीगामनगट्टी गांव में सोयाबीन की फसल को काटकर घर ले जाते किसान।

किसान ने मूली पर चला दिया ट्रैक्टर

कित्तूर कर्नाटक में सूखे के साथ रोगों का कहर

ट्यूबवेल से सींची सब्जियां भी नहीं बचीं

हुब्बल्ली। बारिश की बेरुखी ने कित्तूर कर्नाटक के किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। असिंचित फसलें पानी के अभाव में खेतों में ही सूख रही हैं, तो सिंचाई के भरोसे खड़ी हरी सब्जियां कीट और रोगों की चपेट में आकर बर्बाद हो रही हैं। धारवाड़, बेलगावी, हावेरी, गदग, विजयपुर, बागलकोट और उत्तर कन्नड़ जिलों के कई गांवों में किसान दोहरी मार झेल रहे हैं।

कहीं किसान टैंकरों से पानी खरीदकर फसल बचाने की कोशिश कर रहे हैं, तो कहीं लागत भी न निकलने की स्थिति में खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलाने को मजबूर हैं।

दो एकड़ मूली पर चला ट्रैक्टर

हुब्बल्ली तालुक के गामनगट्टी गांव के किसान शिवानंद मालन्नवर ने बारिश की कमी से हुए नुकसान की भरपाई के लिए दो एकड़ में करीब 20 हजार रुपए खर्च कर मूली की खेती की थी। लेकिन मिट्टी के भीतर सक्रिय सफेद लट यानी रूट ग्रब ने जड़ों को नुकसान पहुंचा दिया। जड़ें सडऩे लगीं और मूली का विकास रुक गया। आखिरकार किसान को पूरी फसल नष्ट करने के लिए खेत में ट्रैक्टर चलाना पड़ा।

शिवानंद ने बताया कि कीट नियंत्रण के लिए बागवानी विभाग से दवा ली है और दोबारा बुवाई की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन बढ़ती लागत के बीच नुकसान की भरपाई मुश्किल है।

जड़ों को कुतर रहा रूट ग्रब

बागवानी विभाग के अनुसार सफेद लट मिट्टी के भीतर रहकर फसलों की जड़ों को नुकसान पहुंचाती है। इससे मूली छोटी, टेढ़ी-मेढ़ी या फटी हुई निकल सकती है। जड़ों को नुकसान पहुंचने से पौधे को पोषण मिलना बंद हो जाता है और पत्तियां पीली पडक़र सूखने लगती हैं।

टैंकर से सिंचाई, फिर भी नहीं बचीं सब्जियां

गामनगट्टी और आसपास के इलाकों में धनिया, मेथी, पालक, पुदीना सहित कई हरी सब्जियां भी तेज धूप से झुलस रही हैं। किसान दिन में दो-तीन बार पानी देने के बावजूद पौधों को बचा नहीं पा रहे हैं। कई जगह बीज अंकुरित होने के बाद ही पौधे सूख गए।

उधर ज्वार और मक्का दाने बनने से पहले ही सूख रहे हैं। सोयाबीन की वृद्धि भी प्रभावित हुई है और कई खेतों में अधपकी फलियां ही रह गई हैं।

फसल नष्ट करने से पहले सूचना दें

बागवानी विभाग हुब्बल्ली के वरिष्ठ सहायक निदेशक अजीतकुमार ने किसानों से अपील की कि कीट या रोग लगने पर हताश होकर फसल नष्ट न करें। फसल उजाडऩे से पहले कृषि या बागवानी विभाग को सूचना दी जाए, ताकि मौके पर निरीक्षण कर नियंत्रण उपाय सुझाए जा सकें और सरकारी सहायता के लिए पंचनामा तैयार किया जा सके।

 

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By Bharat Ki Awaz

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