विजयपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्त्री, शिशु और सामान्य चिकित्सकों के पद महीनों से खाली
प्रशिक्षु डॉक्टरों के भरोसे इलाज, आंदोलन की चेतावनी
विजयपुर (देवनहल्ली)। गरीब मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के उद्देश्य से स्थापित विजयपुर का सरकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खुद बदहाली का शिकार है। महीनों से विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद खाली होने के कारण मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। स्त्री रोग, शिशु रोग और सामान्य चिकित्सक नहीं होने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हैं।
हालात यह हैं कि देवनहल्ली के आकाश अस्पताल से प्रशिक्षु डॉक्टरों को बुलाकर काम चलाया जा रहा है। कई बार उनके भी उपलब्ध नहीं होने पर मरीजों को देवनहल्ली या चिक्कबल्लापुर जाने की सलाह दी जाती है।

60-70 प्रसव से घटकर ठप हुई सेवाएं
स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले अस्पताल में छह से सात डॉक्टर कार्यरत थे और हर महीने 60 से 70 प्रसव होते थे। यहां ऑपरेशन की सुविधा भी थी। अब डॉक्टरों की कमी से प्रसव सहित अन्य सेवाएं प्रभावित हैं। सोमवार को दोपहर 12 बजे तक अस्पताल में कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं था। बाद में एक सामान्य चिकित्सक को बुलाया गया।
200 बेड का सपना अधूरा
पूर्व विधायकों के कार्यकाल में अस्पताल को 200 बिस्तरों वाले उच्चस्तरीय केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनी थी, लेकिन आज 20 बिस्तरों का भी पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। मरीजों का आरोप है कि हृदय रोग, मधुमेह और रक्तचाप जैसी बीमारियों की जरूरी दवाएं तक उपलब्ध नहीं हैं।
मरीज इमरान ने बताया कि निजी अस्पताल में जांच पर ही 700 से 800 रुपए खर्च होते हैं, जो रोज कमाकर परिवार चलाने वाले गरीबों के लिए मुश्किल है। रमेश ने स्वास्थ्य विभाग से डॉक्टरों की नियुक्ति और दवाओं की नियमित आपूर्ति की मांग की।

प्रदर्शन की चेतावनी
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रभारी मंत्री केएच मुनियप्पा और स्वास्थ्य विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि स्थायी विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हुई तो नगरवासी विभिन्न संगठनों के साथ अस्पताल के सामने प्रदर्शन करेंगे।
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