मुंडगोड में खेतों में सूखी बालियां, दाने तलाशने की नौबत
धान के कटोरे में इस बार पसरा सन्नाटा
मुंडगोड (उत्तर कन्नड़)। जिन खेतों में इन दिनों फसल कटाई की हलचल और मजदूरों के सुग्गी गीत सुनाई देने चाहिए थे, वहां सूखे की मार से सन्नाटा पसरा है। खेतों में खड़ी फसल सूख चुकी है और कटाई के लिए तैयार फसल भी बर्बाद हो गई है। इसके बावजूद हर साल की तरह इस बार भी धान कटाई और पराली के ग_र बनाने वाली मशीनें मुंडगोड पहुंची हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त काम नहीं मिल रहा है।
आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु के अलावा कर्नाटक के बल्लारी, गंगावती और होसपेट से धान कटाई करने वाली हार्वेस्टर मशीनें तथा कटाई के बाद बचे पुआल को गोल ग_रों में बांधने वाली मशीनें यहां आई हैं। लेकिन बारिश की कमी के कारण फसल का बड़ा हिस्सा बर्बाद होने से खेतों में कटाई योग्य क्षेत्र ही नहीं बचा है।
सूखे खेतों में दाने तलाश रही मशीनें
बारिश की कमी ने धान की खेती को भारी नुकसान पहुंचाया है। अधिकांश खेतों में फसल सूखी दिखाई दे रही है। कई जगह बालियों में दाने तक नहीं हैं। ऐसे में मशीनों के सामने कटाई का काम नहीं के बराबर है। हर साल मशीनों को कई महीनों तक काम मिलता था, लेकिन इस बार हालात बिल्कुल अलग हैं।
किसानों का कहना है कि फसल से अनाज नहीं मिला तो कम से कम पशुओं के लिए चारा जुटाने की कोशिश की जा रही है। कई किसान सूखे पुआल को मशीनों से गोल ग_रों में बंधवाकर जमा कर रहे हैं। कभी धान उत्पादन के लिए पहचान रखने वाले इस क्षेत्र के खेतों में अब दाने रहित बालियां नजर आ रही हैं।
किसानों की शिकायत है कि क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने के बावजूद अब तक उन्हें प्रत्यक्ष रूप से कोई सहायता नहीं मिली है।
तीन महीने के काम की जगह एक महीने का भी भरोसा नहीं
धान कटाई मशीन के चालक मणि ने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी हम धान की कटाई के लिए आए हैं। प्रति एकड़ दर पिछले साल के बराबर ही रखी गई है। दर नहीं बढ़ाई गई, लेकिन कटाई के लिए खेत भी पर्याप्त नहीं मिल रहे हैं। पिछले पांच-छह वर्षों में पहली बार ऐसी स्थिति बनी है। पहले यहां तीन महीने तक काम मिलता था, लेकिन इस बार एक महीने तक काम मिलेगा या नहीं, इसे लेकर भी आशंका है।
बिना दाने की फसल कटवाना भी घाटे का सौदा
प्रगतिशील किसान सोमण्णा बंकापुर ने चिंता जताते हुए कहा कि धान की फसल तो खेतों में खड़ी है, लेकिन उसमें दाने नहीं हैं। ऐसी फसल की कटाई कराने पर किसानों को लागत भी अपनी जेब से चुकानी पड़ेगी। इसलिए कई किसानों ने बिना दाने वाली फसल को कटवाने के बजाय खेतों में ही छोड़ दिया है। वे केवल पशुओं के लिए जरूरी चारा कटवा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कटाई मशीनें एक खेत से दूसरे खेत तक जाकर ऐसी बालियां तलाश रही हैं, जिनमें कुछ ठोस दाने मिल सकें। कभी धान के कटोरे के रूप में पहचाने जाने वाले मुंडगोड में अब कटाई के लिए धान के खेत तलाशने की स्थिति बन गई है।
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