सूखे में मक्का बना सहारा, भाव 3,300 रुपए क्विंटल तक

बागलकोट. सूखे और बारिश की कमी ने इस साल मक्का उत्पादक किसानों की कमर तोड़ दी है, लेकिन बाजार में इसी फसल को मिल रही ऊंची कीमत ने कुछ किसानों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है। कर्नाटक की मंडियों में मक्का का भाव 3,000 रुपए प्रति क्विंटल के पार पहुंच गया है। बागलकोट कृषि उपज मंडी में किसानों को 3,100 से 3,300 रुपए प्रति क्विंटल तक कीमत मिल रही है। जिले में पिछले वर्ष करीब 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मक्के की खेती हुई थी, जबकि इस वर्ष रकबा घटकर केवल 40,165 हेक्टेयर रह गया। कम बारिश के कारण बोई गई फसल का बड़ा हिस्सा भी प्रभावित हुआ है। नतीजतन बाजार में मक्के की आवक घट गई और उपलब्ध उपज को बेहतर कीमत मिलने लगी।

कई मंडियों में ऊंचे दाम

बागलकोट के अलावा राज्य की अन्य कृषि उपज मंडियों में भी मक्के के अच्छे भाव मिल रहे हैं। हिरेकेरूर में 2,500 से 3,400 रुपए, जबकि हावेरी और होन्नाली में 2,500 से 3,300 रुपए प्रति क्विंटल तक कीमत दर्ज की जा रही है। केंद्र सरकार ने मक्के का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,410 रुपए प्रति क्विंटल घोषित किया है। हर साल किसान सरकार से समर्थन मूल्य पर मक्का खरीदने की मांग करते रहे हैं। लेकिन इस बार बाजार भाव समर्थन मूल्य से ऊपर होने के कारण किसानों को खुले बाजार में बिक्री से बेहतर दाम मिल रहे हैं।

कम उत्पादन और एथेनॉल की मांग का असर

मक्का महंगा होने के पीछे कम उत्पादन के साथ एथेनॉल उद्योग की मांग भी एक महत्वपूर्ण वजह बताई जा रही है। इस वर्ष केंद्र सरकार ने गन्ने से एथेनॉल उत्पादन नहीं करने का निर्देश दिया है। ऐसे में एथेनॉल उत्पादन में मक्के का उपयोग बढऩे से इसकी मांग और कीमत को सहारा मिला है।खेती की लागत भी किसानों के लिए बड़ी चुनौती है। वर्षा आधारित जमीन में एक एकड़ मक्का उगाने पर 20 हजार रुपए से अधिक खर्च आता है और 15 से 20 क्विंटल उपज मिलती है। सिंचित क्षेत्र में लागत करीब 25 हजार रुपए प्रति एकड़ तक पहुंच जाती है। कुशलगेरी गांव के किसान वाई. महांतेश के अनुसार, सूखे के कारण इस बार हाथ में फसल कम है। ऊंचे भाव से सिंचित क्षेत्र के किसानों को लाभ मिल रहा है, लेकिन वर्षा आधारित खेती करने वाले किसान नुकसान में हैं।

आवक कम, कीमत अधिक

बागलकोट कृषि उपज मंडी के सचिव वी.डी. पाटील ने बताया कि सूखे के कारण मंडी में मक्के की आवक कम हो रही है। बाजार में उपलब्ध उपज की मात्रा घटने से किसानों को अधिक कीमत मिल रही है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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