धारवाड़ जिले में भूजल संकट गहराया, सात तालुकों में जलस्तर नीचे खिसका
48 प्रतिशत कम बारिश से किसानों के सामने सिंचाई और पेयजल का दोहरा संकट
धारवाड़. मानसून की बेरुखी के बाद अब भूजल स्तर में गिरावट ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। कभी खेती और ग्रामीण जीवन का आधार रहे तालाब, कुएं और छोटी जलधाराएं तेजी से सूख रही हैं। खेतों की सिंचाई का प्रमुख सहारा माने जाने वाले बोरवेल भी अब किसानों का साथ छोडऩे लगे हैं। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि किसानों के सामने एक ओर खड़ी फसल बचाने की चुनौती है, तो दूसरी ओर परिवार और मवेशियों के लिए पीने का पानी जुटाने की चिंता।
कर्नाटक के धारवाड़ जिले में बारिश की भारी कमी, भूजल का पर्याप्त पुनर्भरण नहीं होना और पानी की लगातार बढ़ती मांग ने कृषि व्यवस्था पर गंभीर असर डाला है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में 1 जून से 30 सितंबर तक सामान्य तौर पर 513.9 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन वास्तविक वर्षा केवल 267.8 मिलीमीटर दर्ज की गई। यानी सामान्य से लगभग 48 प्रतिशत कम बारिश हुई। इसका सीधा असर खेतों की नमी, फसलों की वृद्धि और कृषि उत्पादन पर पड़ रहा है।
कर्ज के बोझ तले किसान, सूखती फसलें और जवाब देता बोरवेल
किसानों के लिए सबसे बड़ी परेशानी यह है कि भारी खर्च करके बोरवेल खुदवाने के बावजूद पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। कई स्थानों पर बोरवेल से दिन में केवल एक-दो घंटे ही पानी उपलब्ध हो पा रहा है। ऐसे में किसान असमंजस में हैं कि इस सीमित पानी का इस्तेमाल फसल बचाने के लिए करें या परिवार की पेयजल जरूरतों के लिए सुरक्षित रखें। कुंदगोल के किसान शिवराज यल्लप्पा बेल्लट्टी ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि भीषण सूखे के कारण उनकी नौ एकड़ जमीन में बोरवेल से केवल लगभग दो इंच पानी मिल रहा है, जो खेती के लिए पर्याप्त नहीं है। काली मिट्टी में दरारें पडऩे लगी हैं और रबी की फसल भी हाथ आने की उम्मीद कम दिखाई दे रही है। उन्होंने बताया कि किसानों ने निजी उधार और बैंक से कर्ज लेकर बुवाई की थी, लेकिन अब फसलों को सूखते देखकर आर्थिक संकट की चिंता बढ़ गई है।
कलघटगी में भी गहराया जल संकट, गर्मियों की चिंता अभी से
कलघटगी तालुक के किसान लव जाधव के अनुसार, आसपास के तालाब और जलाशय सूख रहे हैं तथा बोरवेल में भी पानी की उपलब्धता लगातार कम हो रही है। यदि यही स्थिति जारी रही तो आने वाली गर्मियों में सिंचाई ही नहीं, बल्कि पीने के पानी का संकट भी गंभीर रूप ले सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है। पशुओं के लिए पानी जुटाना भी कठिन होता जा रहा है। कई गांवों में बोरवेल से मिलने वाले पानी की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
जिले के सात तालुकों में भूजल स्तर में गिरावट
धारवाड़ जिले के भूजल आंकड़े भी चिंताजनक तस्वीर पेश कर रहे हैं। जिला भूजल कार्यालय के वरिष्ठ भूविज्ञानी मल्लिकार्जुन बलीगार के अनुसार, जिले के आठ तालुकों में से सात में वर्ष 2021 से 2025 के औसत की तुलना में भूजल स्तर अधिक गहराई में चला गया है। आंकड़ों के अनुसार कलघटगी में भूजल स्तर की गहराई 2.75 मीटर बढ़ी। हुब्बल्ली में 1.16 मीटर की वृद्धि दर्ज की गई। धारवाड़ में 1.12 मीटर की वृद्धि हुई। अन्निगेरी, कुंदगोल, अल्तावर और हुब्बल्ली शहर में भी भूजल की गहराई बढऩे की जानकारी सामने आई है। केवल नवलगुंद में भूजल स्तर की गहराई 1.58 मीटर कम हुई है। ये आंकड़े संकेत देते हैं कि जिले के अधिकांश हिस्सों में जमीन के नीचे मौजूद जल संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है।
कई गांवों में खेती और पशुओं के लिए भी अनुपयुक्त पानी
ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट का एक और गंभीर पहलू सामने आया है। किसान बसवराज योगप्पनवर ने चिंता जताई कि गुडेनकट्टी, एरिनारायणपुर, मुल्लल्ली, बेनकनहल्ली, हिरेनर्ति, यरगुप्पी और रोट्टीगवाड़ सहित कई गांवों में बोरवेल से ऐसा पानी मिल रहा है, जो खेती और मवेशियों के इस्तेमाल के लिए भी उपयुक्त नहीं माना जा रहा है। लगातार घटती जल उपलब्धता ने किसानों को अपनी खेती की रणनीति बदलने के लिए मजबूर कर दिया है। अधिक पानी की आवश्यकता वाली फसलों से दूरी बनाकर किसान अब कम सिंचाई में तैयार होने वाली फसलों की ओर रुख कर रहे हैं।
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