11 फीट लंबे किंग कोबरा का सिद्धर गांव में मिला ठिकाना
भोजन की तलाश या प्राकृतिक आवास में बढ़ता व्यवधान, विशेषज्ञों ने जताई आशंका
कारवार. दुनिया के सबसे विशिष्ट और रहस्यमयी विषैले सांपों में शामिल किंग कोबरा यानी नागराज अब जंगलों की सीमाएं छोडक़र रिहायशी इलाकों की ओर पहुंचने लगे हैं। उत्तर कन्नड़ जिले के कारवार तालुक में इस वर्ष आठ से अधिक किंग कोबरा सांपों को वन विभाग ने सुरक्षित बचाकर दोबारा जंगल में छोड़ा है। लगातार आबादी वाले क्षेत्रों में इनकी मौजूदगी सामने आने से वन्यजीव विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के बीच चिंता बढ़ गई है।
किंग कोबरा का जीवनचक्र अन्य सांपों से काफी अलग और विशिष्ट माना जाता है। यह दुनिया का एकमात्र ऐसा सांप है जो अंडे देने के लिए बाकायदा घोंसला बनाता है और अपने अंडों की सुरक्षा करता है। यह प्रजाति सामान्यत: सदाबहार घने जंगलों में रहना पसंद करती है और मानवीय आवाजाही तथा शोरगुल से दूर रहती है।
वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से भी किंग कोबरा बेहद महत्वपूर्ण है। इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-1 के अंतर्गत संरक्षित किया गया है।
अपनी सीमा में ही बिताता है पूरा जीवन
किंग कोबरा की सबसे दिलचस्प विशेषताओं में से एक इसका निश्चित निवास क्षेत्र है। यह सांप अपने रहने और विचरण करने की एक सीमा निर्धारित करता है तथा सामान्यत: उसी क्षेत्र में अपना जीवन बिताता है। इसकी गतिविधियों का दायरा लगभग साढ़े तीन से पांच किलोमीटर तक हो सकता है। हालांकि हाल के दिनों में कारवार के शहरी और ग्रामीण इलाकों में इनकी मौजूदगी बढ़ती दिखाई दे रही है। भोजन की तलाश में जंगल से बाहर निकलकर आबादी के आसपास पहुंचने की घटनाएं सामने आ रही हैं।
सिद्धर गांव में मिला 11 फीट लंबा किंग कोबरा
कारवार तालुक के सिद्धर गांव के रिहायशी इलाके में लगभग 11 फीट लंबा किंग कोबरा दिखाई देने से स्थानीय लोगों में हलचल मच गई। सूचना मिलने पर वन विभाग के वन गश्ती अधिकारी एवं वनपाल गोपाल नायक अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और सांप का सुरक्षित बचाव किया।इसके बाद उसे प्राकृतिक आवास में वापस छोडऩे की कार्रवाई की गई। इस वर्ष कारवार के बिणगा और आसपास के क्षेत्रों में भी कई किंग कोबरा दिखाई दिए हैं। जिले के अन्य हिस्सों की तुलना में कारवार तालुक में इस साल इनकी उपस्थिति अधिक दर्ज की गई है।
क्या बढ़ रही है किंग कोबरा की संख्या या जंगल में बढ़ रहा संकट
विशेषज्ञों के अनुसार, आबादी वाले क्षेत्रों में किंग कोबरा के पहुंचने के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं। एक संभावना यह है कि क्षेत्र में इनकी संख्या बढ़ रही हो। दूसरी आशंका यह है कि प्राकृतिक आवास में किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न होने के कारण ये सांप भोजन और सुरक्षित स्थान की तलाश में जंगल से बाहर निकल रहे हों। घने जंगलों में रहने वाले इन दुर्लभ सांपों का बार-बार रिहायशी इलाकों में दिखाई देना वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक पर्यावरण के बीच बदलते संबंधों की ओर संकेत करता है।
वन्यजीव संरक्षण के लिए सतर्कता जरूरी
कारवार में लगातार सामने आ रही घटनाएं किंग कोबरा के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं। स्थानीय नागरिकों के लिए भी जरूरी है कि सांप दिखाई देने पर उसके करीब जाने, उसे पकडऩे या नुकसान पहुंचाने का प्रयास न करें, बल्कि तत्काल वन विभाग को सूचना दें। कारवार में इस वर्ष आठ से अधिक किंग कोबरा का बचाव केवल वन्यजीवों की मौजूदगी का मामला नहीं है, बल्कि यह उनके प्राकृतिक आवास और बदलते पर्यावरण पर ध्यान देने का महत्वपूर्ण संकेत भी है।
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