पीयूसी व्यवस्था में कंप्यूटरीकरण से पारदर्शिता पर जोर
दोपहिया के 80, पेट्रोल कार के 150 और डीजल वाहन के 200 रुपए तय
हुब्बल्ली। प्रदूषण नियंत्रण की शुरुआत सडक़ पर दौडऩे वाले हर वाहन से होती है। वाहन से निकलने वाला धुआं कितना प्रदूषक है, उसकी जांच कितनी सही हो रही है और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है—ये तीनों सवाल सीधे शहर की हवा और नागरिकों की सेहत से जुड़े हैं।
हुब्बल्ली-धारवाड़ में इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए 40 प्रदूषण जांच केंद्र संचालित हैं। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) श्रीकांत बडिगेर के अनुसार, सभी केंद्र वैध हैं और यहां कंप्यूटरीकृत प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं। विभाग को अब तक किसी केंद्र के खिलाफ शिकायत नहीं मिली है।
जुड़वां शहरों में बढ़ती वाहन आवाजाही के बीच प्रदूषण की नियमित जांच पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण आधार है। इन 40 केंद्रों में 38 प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) केंद्र और उत्तर पश्चिम कर्नाटक सडक़ परिवहन निगम के दो केंद्र शामिल हैं। कंप्यूटरीकृत व्यवस्था से जांच का रिकॉर्ड रखने और प्रमाणपत्रों की प्रामाणिकता बनाए रखने में मदद मिलती है। हालांकि, व्यवस्था की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि प्रत्येक वाहन की जांच निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हो और परिणाम वास्तविक प्रदूषण स्तर को दर्शाएं।
जांच की नई दरें लागू
कर्नाटक में 15 अगस्त 2026 से पीयूसी जांच की संशोधित दरें लागू हैं। इनके अनुसार, दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए 80 रुपए, पेट्रोल, एलपीजी और सीएनजी से चलने वाले चारपहिया वाहनों के लिए 150 रुपए तथा डीजल वाहनों के लिए 200 रुपए शुल्क निर्धारित किया गया है। वाहन चालकों को निर्धारित दरों की जानकारी रखनी चाहिए और जांच के बाद प्रमाणपत्र की वैधता पर ध्यान देना चाहिए।
मशीन से प्रमाणपत्र तक, हर चरण महत्वपूर्ण
पीयूसी जांच केवल प्रमाणपत्र जारी करने की औपचारिकता नहीं है। जांच मशीनों का सही ढंग से काम करना, उनका समय-समय पर अंशांकन और निर्धारित मानकों के अनुसार जांच करना भी जरूरी है। वाहन से निकलने वाले धुएं में प्रदूषक तत्व तय सीमा से अधिक पाए जाने पर संबंधित वाहन के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
वाहन चालकों की सतर्कता, केंद्रों की जवाबदेही और परिवहन विभाग की नियमित निगरानी—इन तीनों के तालमेल से प्रदूषण नियंत्रण को प्रभावी बनाया जा सकता है। 40 वैध केंद्रों की उपलब्धता एक सकारात्मक आधार है, अब जरूरी है कि प्रत्येक जांच सटीक हो और हर प्रमाणपत्र वास्तविक स्थिति को प्रतिबिंबित करे।

जांच केंद्रों का निरीक्षण करते हैं अधिकारी
वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए एमिशन टेस्ट महत्वपूर्ण है। इसके तहत वाहन के धुएं की जांच कर यह पता लगाया जाता है कि उससे निकलने वाले प्रदूषक निर्धारित मानकों के भीतर हैं या नहीं। निर्धारित मानकों पर खरा उतरने वाले वाहनों को ही पीयूसी प्रमाणपत्र दिया जाता है। पीयूसी केंद्रों को आरटीओ कार्यालय से अनुमति मिलती है और अधिकारी समय-समय पर जांच केंद्रों का निरीक्षण करते हैं।
–राहुल मोसले, पीयूसी केंद्र संचालक, बेंगेरी

पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी भी जरूरी
हमारे केंद्र में प्रतिदिन 25 से 30 वाहनों की जांच होती है। वाहन चालकों को प्रदूषण प्रमाणपत्र केवल पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझकर बनवाना चाहिए। पुराने और नए वाहनों की नियमित जांच करानी चाहिए तथा निर्धारित सीमा से अधिक प्रदूषण मिलने पर वाहन की मरम्मत करवाकर दोबारा जांच करानी चाहिए।
–किशोर कुमार, पीयूसी केंद्र संचालक, लैमिंगटन रोड
शिकायत मिलने पर होगी कार्रवाई
जुड़वां शहरों के सभी 40 प्रदूषण जांच केंद्र वैध हैं। अब तक किसी केंद्र के खिलाफ शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने पर जांच की जाएगी और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई होगी। निर्धारित मानकों से अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ भी कदम उठाए जाएंगे।
–श्रीकांत बडिगेर, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, हुब्बल्ली
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