पानी के बिल की कतारें घटीं, डिजिटल भुगतान 50 प्रतिशत तक पहुंचाएआई फोटो।

हुब्बल्ली-धारवाड़ में साढ़े चार साल में बड़ा बदलाव

करीब 347 करोड़ रुपए का जल शुल्क बकाया, वसूली के लिए निगम सख्त

हुब्बल्ली। पानी का बिल भरने के लिए हुब्बल्ली-धारवाड़ महानगर निगम कार्यालयों के चक्कर लगाने वाले उपभोक्ताओं की संख्या घट रही है। जुड़वां शहरों में जल शुल्क के डिजिटल भुगतान की हिस्सेदारी साढ़े चार साल में पांच प्रतिशत से बढक़र 48 से 50 प्रतिशत तक पहुंच गई है। अब हर महीने जमा होने वाले जल बिल का लगभग आधा भुगतान ऑनलाइन माध्यमों से किया जा रहा है। हालांकि, डिजिटल भुगतान बढऩे के बावजूद करोड़ों रुपए का बकाया निगम के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

घर बैठे भुगतान, तत्काल रसीद

उपभोक्ता महानगर निगम की जल सेवा वेबसाइट के माध्यम से घर बैठे बिल जमा कर सकते हैं। फोनपे, पेटीएम, भीम यूपीआई, अमेजन पे, गूगल पे, क्रेडिट-डेबिट कार्ड और नेट बैंकिंग सहित कई विकल्प उपलब्ध हैं। बिल पर छपे गतिशील क्यूआर कोड को स्कैन करके भी भुगतान किया जा सकता है। भारत बिल भुगतान प्रणाली और कर्नाटक वन के माध्यम से भी जल शुल्क जमा करने की सुविधा है। भुगतान पूरा होने के बाद डिजिटल रसीद मिल जाती है।

निगम ने मीटर रीडरों के माध्यम से मौके पर भुगतान और एलएंडटी के नकदी रहित भुगतान केंद्रों की सुविधा भी जारी रखी है। इससे उपभोक्ताओं को भुगतान के लिए कार्यालय पहुंचने की जरूरत कम हुई है।

करीब 347 करोड़ रुपए का बकाया

डिजिटल भुगतान में वृद्धि के बावजूद जल बिलों का बकाया चिंता का विषय है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कुल बकाया करीब 347 करोड़ रुपए है। इसमें लगभग 144 करोड़ रुपए ब्याज के हैं। घरेलू उपभोक्ताओं पर 183.31 करोड़ रुपए और ग्रामीण क्षेत्रों के कनेक्शनों पर 130.55 करोड़ रुपए की देनदारी बताई गई है।

अगस्त के अंत तक शहर में कुल 1,86,401 जल कनेक्शन दर्ज किए गए थे। इनमें 1,82,801 घरेलू, 2,250 वाणिज्यिक और 1,290 गैर-घरेलू कनेक्शन शामिल हैं।

उपभोक्ता एकमुश्त समाधान योजना लागू करने की मांग कर रहे हैं। वर्ष 2012 में ऐसी योजना लागू होने का हवाला देते हुए उपभोक्ताओं का कहना है कि ब्याज में राहत मिलने से भुगतान करना आसान हो सकता है।

पांच हजार से अधिक बकायेदारों को नोटिस

पांच हजार रुपए से अधिक बकाया रखने वाले उपभोक्ताओं को नोटिस दिए जा रहे हैं। भुगतान नहीं करने पर जल कनेक्शन काटने की कार्रवाई भी की जा रही है। एकमुश्त समाधान योजना लागू करने की मांग को लेकर निगम की ओर से सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।
–सविता कटिगेण्णवर, अधीक्षण अभियंता, केयूआईडीएफसी

 

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