महज 2.80 लाख रुपए में सिंचाई का स्थायी रास्ता
अब साल में दो फसलें, सुपारी के बागानों को भी मिली नई जिंदगी
सिरसी। पहाड़ों की दुर्गम ढलान, पानी की किल्लत और बारिश पर निर्भर खेती। कभी यही परिस्थितियां उत्तर कन्नड़ जिले के सिरसी तालुक स्थित सोनगिनमने गांव के किसानों की सबसे बड़ी मजबूरी थीं। बारिश थमते ही खेत सूखने लगते और सुपारी के बागानों को बचाना मुश्किल हो जाता था। लेकिन पांच-छह परिवारों ने सामूहिक प्रयास से इस चुनौती का रास्ता निकाल लिया। पहाड़ों के बीच डेढ़ किलोमीटर लंबी नहर बनाकर प्राकृतिक जलस्रोत का पानी खेतों तक पहुंचाया और खेती की तस्वीर बदल दी।
केंद्र सरकार की वीबी-जी राम जी योजना के तहत महज 2.80 लाख रुपए की लागत से बनी इस नहर ने गांव के किसानों के लिए सिंचाई की नई राह खोल दी है। अब जिस पानी का उपयोग पहले नहीं हो पाता था, वही खेतों और बागानों की हरियाली का आधार बन रहा है। कभी केवल एक फसल पर निर्भर रहने वाले किसान अब साल में दो फसलें लेने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
पहाड़ी भूभाग बना था सबसे बड़ी चुनौती
कोडनगड्डे ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले इस दुर्गम गांव में पहाड़ी भूभाग के कारण सिंचाई की स्थायी व्यवस्था करना आसान नहीं था। बारिश के बाद खेतों और सुपारी के बागानों में पानी की कमी होने लगती थी। ग्रामीणों ने इस समस्या का समाधान खोजते हुए करीब डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित प्राकृतिक जलस्रोत का पानी खेतों तक लाने की योजना बनाई।
वैज्ञानिक नक्शे के आधार पर ढलानदार और कठिन पहाड़ी जमीन पर नहर का निर्माण किया गया। इसके बाद प्राकृतिक झरने का पानी कृषि भूमि तक पहुंचने लगा। कम लागत में तैयार इस व्यवस्था ने किसानों को पानी की समस्या से काफी हद तक राहत दी है।
धान से लेकर काली मिर्च तक बढ़ीं संभावनाएं
नहर से सिंचाई की सुविधा मिलने के बाद धान की खेती के साथ सुपारी के बागानों में नारियल, काली मिर्च और सब्जियों की खेती भी की जा रही है। इससे किसानों के पास आमदनी के कई स्रोत विकसित हुए हैं। साल में दो फसलें लेने की संभावना ने उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने की उम्मीद जगाई है।
ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास की मिसाल
बारिश समाप्त होने के बाद खेतों और सुपारी के बागानों को पानी देना बड़ी चुनौती थी। नहर बनने से बागानों को नई जिंदगी मिली है और गर्मियों में सिंचाई की चिंता काफी कम हुई है।
–परमेश्वर हेगड़े, ग्रामीण
खेती से नियमित आय की संभावनाएं बढ़ी
नहर से सिंचाई के साथ पहाड़ी ढलानों पर पानी के तेज बहाव से होने वाले उपजाऊ मिट्टी के कटाव को रोकने में भी मदद मिली है। निर्माण कार्य के दौरान ग्रामीणों को रोजगार मिला, जबकि अब खेती से नियमित आय की संभावनाएं बढ़ी हैं।
–चन्नबसप्पा हावणगी, कार्यकारी अधिकारी, तालुक पंचायत
सोनगिनमने गांव की यह पहल बताती है कि स्थानीय जरूरतों के अनुरूप योजना और सामूहिक भागीदारी से कम लागत में भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाले काम किए जा सकते हैं। डेढ़ किलोमीटर की नहर यहां केवल पानी पहुंचाने का माध्यम नहीं, बल्कि किसानों के लिए बेहतर उपज और आत्मनिर्भरता की नई उम्मीद बन गई है।
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