14 साल से सफाई नहीं
सरकारी अनदेखी से तंग 30 से अधिक किसानों ने खुद संभाली कमान
जहरीले जीवों के बीच उतरे नहर में
नालतवाड़ (विजयपुर)। नहर में पानी है, लेकिन खेतों तक पहुंचने का रास्ता गाद और झाडिय़ों ने रोक रखा है। उधर, सिंचाई के अभाव में फसलें सूख रही हैं और किसानों की मेहनत पर संकट मंडरा रहा है। अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई तो किसानों ने खुद ही नहर की सफाई का जिम्मा उठा लिया। चिम्मलगी लिफ्ट सिंचाई परियोजना की पश्चिमी क्षेत्र की 13ए नहर में 30 से अधिक किसान गाद और झाडिय़ां हटाने में जुटे हैं। जहरीले जीव-जंतुओं के खतरे के बीच उनकी कोशिश किसी तरह पानी का प्रवाह बहाल कर फसलों को बचाने की है।
नालतवाड़, अरसनाल, नेरबंची, जैनापुर, माविनभावी, किलारहट्टी और आरेशंकर गांवों के किसानों ने एकजुट होकर यह पहल की है। किसानों का कहना है कि सिंचाई की सुविधा होने के बावजूद नहर की बदहाली के कारण उन्हें पानी नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में सरकारी व्यवस्था की प्रतीक्षा करने के बजाय उन्होंने खुद श्रमदान शुरू किया है।
14 साल में सफाई नहीं, किसान फिर परेशान
किसानों के मुताबिक, चिम्मलगी लिफ्ट सिंचाई नहर का निर्माण करीब 14 साल पहले हुआ था। इसके बाद से नहर की व्यवस्थित सफाई नहीं की गई। गाद और झाडिय़ों के कारण पानी का प्रवाह बार-बार बाधित होता है। पहले भी ऐसी स्थिति आने पर किसानों को अपने खर्च पर सफाई करानी पड़ी थी। किसान अप्पन्ना गंगनगौडर ने बताया कि इस बार भी फसलें बचाने के लिए उन्हें खुद नहर में उतरना पड़ा है।
पानी छोड़े तीन दिन बीते, फिर भी खेत प्यासे
सूखे की स्थिति को देखते हुए विधायक सी.एस. नाडगौड़ा ने नहर के माध्यम से तालाबों को भरने के लिए संबंधित मंत्री से पानी छोडऩे की मांग की थी। इसके बाद नहर में पानी छोड़ा गया, लेकिन गाद और झाडिय़ों के कारण नालतवाड़ क्षेत्र तक उसका प्रवाह नहीं पहुंच पाया। किसानों का कहना है कि पानी छोड़े तीन दिन बीत चुके हैं, फिर भी नहर के अगले हिस्से तक पानी नहीं पहुंचा है।
ठोस कार्रवाई नहीं हुई
किसान संगन्ना कुलगेरी, वीरेश अवूजी और अप्पन्ना गंगनगौडर ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उनके खेत नहर के पास ही हैं। यदि एक बार भी पर्याप्त पानी मिल जाए तो सूखती फसलों को बचाया जा सकता है। अधिकारियों को समस्या बताने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
किसानों ने सवाल उठाया कि जब नहर की सफाई से लेकर पानी का रास्ता खोलने तक का काम उन्हें ही करना है, तो संबंधित विभाग अपनी जिम्मेदारी कब निभाएगा।
अब किसानों की पूरी उम्मीद इसी सफाई पर टिकी है। नहर का रास्ता खुला तो खेतों को पानी मिल सकता है, लेकिन देरी हुई तो उनकी महीनों की मेहनत बर्बाद होने का खतरा है।
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