दस महीने में 11 टीएमसी पानी घटा, वीवी सागर पर बढ़ा दबाव
न बारिश, न भद्रा से आवक
चित्रदुर्ग, हिरियूर और चिल्लकेरे की पेयजल आपूर्ति पर चिंता
चित्रदुर्ग। गर्मियां अभी दूर हैं, लेकिन कर्नाटक के प्रमुख जलाशयों में शामिल वाणी विलास सागर (वीवी सागर) में पानी की तेजी से घटती मात्रा ने आने वाले संकट की आशंका बढ़ा दी है। करीब 30 टीएमसी क्षमता वाले इस जलाशय से महज दस महीने में लगभग 11 टीएमसी पानी कम हो गया है। इस साल न मानसून से पर्याप्त पानी मिला, न भद्रा नदी से आवक हुई। दूसरी ओर, पेयजल, सिंचाई और बैराजों की जरूरतें पूरी करने के लिए लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। यही स्थिति बनी रही तो गर्मियों में चित्रदुर्ग जिले के कई शहरों और गांवों के सामने पेयजल संकट खड़ा हो सकता है।
हिरियूर तालुक की जीवनरेखा माने जाने वाले वीवी सागर पर हिरियूर, चित्रदुर्ग और चिल्लकेरे शहरों के साथ आसपास के गांवों की जलापूर्ति निर्भर है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और अन्य केंद्रीय अनुसंधान संस्थानों को भी इसी जलाशय से पानी दिया जाता है। प्रतिदिन करीब 32.156 क्यूसेक पानी पेयजल जरूरतों के लिए छोड़ा जा रहा है। ऐसे में जलाशय में नई आवक नहीं होना प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बन गया है।
सिंचाई और बैराजों के लिए भी हुई निकासी
बारिश की कमी से खेती और बागवानी पर संकट गहराने के बाद किसानों की मांग पर दो चरणों में सिंचाई के लिए पानी छोड़ा गया। पहले चरण में 21 अप्रेल से 20 मई तक 1.87 टीएमसी और दूसरे चरण में 18 अगस्त से 17 सितंबर तक 2.297 टीएमसी पानी छोड़ा गया। वेदावती नदी के रास्ते हिरियूर और चिल्लकेरे क्षेत्र के 22 बैराजों के लिए 0.914 टीएमसी तथा सुवर्णमुखी नदी क्षेत्र के बैराजों के लिए 0.1 टीएमसी पानी दिया गया।
पिछले साल बारिश, भद्रा नदी और एत्तिनहोले परियोजना से पानी मिलने के कारण 18 अक्टूबर 2025 को जलाशय छलक गया था। इसी भंडार के सहारे इस साल की जरूरतें पूरी की जा रही हैं। लेकिन इस बार बारिश और बाहरी स्रोतों से पानी नहीं मिलने के कारण भंडार लगातार घट रहा है।
18 टीएमसी उपयोग योग्य पानी, लेकिन चिंता बरकरार
13 अक्टूबर को जलाशय का जलस्तर 116.65 फीट दर्ज किया गया था। उस समय कुल जलभंडार 19.932 टीएमसी और उपयोग योग्य पानी 18.062 टीएमसी था। यदि नई आवक नहीं हुई और निकासी जारी रही, तो गर्मियों के अंतिम दौर में जलाशय के डेड स्टोरेज तक पहुंचने की आशंका है। इससे पेयजल आपूर्ति के साथ बागवानी फसलों को बचाना भी मुश्किल हो सकता है।
वीवी सागर के सहायक अभियंता एस.पी. नागेंद्र के अनुसार, सरकार के निर्देशों के तहत सिंचाई, बैराजों और पेयजल जरूरतों के लिए पानी छोड़ा गया है। इस वर्ष बारिश नहीं होने के कारण जलाशय में पानी की आवक नहीं हुई।
अब सबसे बड़ा सवाल है—बिना नई आवक के वीवी सागर का बचा हुआ पानी गर्मियों तक कितने शहरों, गांवों और खेतों की प्यास बुझा पाएगा?
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