दो वार्डों में दो महीने से खराब पंपसेट, गांव में पानी का संकट

सप्ताह में सिर्फ दो दिन जलापूर्ति

नालियों का गंदा पानी नलकूप में मिलने से बीमारी फैलने का खतरा, ग्रामीणों ने अधिकारियों पर लगाया अनदेखी का आरोप

मादनहिप्परगी (कलबुर्गी)। गांव में पेयजल संकट गहराने से ग्रामीणों को रोजाना पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। ग्राम पंचायत के वार्ड नंबर 3 और 4 में पिछले दो महीने से बोरवेलों के पंपसेट खराब पड़े हैं, लेकिन अब तक उनकी मरम्मत नहीं कराई गई। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत करने पर पंचायत अधिकारी बजट नहीं होने और पहले कर चुकाने का हवाला देकर उन्हें लौटा देते हैं। सूखे और फसल खराब होने से पहले ही आर्थिक संकट झेल रहे किसानों के सामने अब पीने के पानी का इंतजाम करना भी मुश्किल हो गया है।

आठ किलोमीटर दूर से पानी, सप्ताह में दो दिन आपूर्ति

गांव में आठ किलोमीटर दूर केरूर के कुएं से पानी लाया जाता है। वार्ड नंबर 1, 2, 4 और 8 में सप्ताह में केवल दो दिन जलापूर्ति होती है। पानी आने के दिन ग्रामीणों को अपने जरूरी काम छोडक़र दोपहर की तेज धूप में इंतजार करना पड़ता है। महिलाओं को पानी के बर्तन लेकर एक किलोमीटर दूर तक भटकना पड़ रहा है।

नाली का गंदा पानी बोरवेल में मिलने का आरोप

गांव में सफाई व्यवस्था भी बदहाल है। नालियां जाम होने से गंदा पानी सडक़ों पर बह रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि वार्ड नंबर 4 में नाली का दूषित पानी बोरवेल में मिल रहा है। इसके बावजूद पंचायत की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इससे दूषित पानी पीने और बीमारियां फैलने की आशंका बढ़ गई है।

अधिकारी एक-दूसरे पर टाल रहे जिम्मेदारी

ग्रामीणों के अनुसार, पंचायत का कार्यकाल समाप्त होने के बाद सरकार की ओर से नियुक्त नोडल अधिकारी रमेश जाधव अब तक गांव नहीं आए। उनसे संपर्क करने पर वे पंचायत विकास अधिकारी (पीडीओ) से बात करने को कहते हैं, जबकि पीडीओ धन की कमी का हवाला देते हैं। प्रभारी पीडीओ भी सप्ताह में एक बार या 15 दिन में कार्यालय आते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्यालय में मौजूद बिल कलेक्टर भी उनकी शिकायतें सुनने के बजाय बहस कर उन्हें लौटा देते हैं।

निजी कुओं से पानी लेने की मांग

ग्राम प्रमुख चिदंबर सराफ ने मांग की कि जिलाधिकारी राहत निधि का उपयोग कर निजी बोरवेलों या कुओं को अधिग्रहित करके ग्रामीणों को पानी उपलब्ध कराया जाए। किसान ईरन्ना मुदगुले ने सवाल उठाया कि पंचायत की दुकानों से मिलने वाली जमानत राशि और किराए का उपयोग पंपसेट की मरम्मत तथा नालियों की सफाई के लिए क्यों नहीं किया गया। उन्होंने इन पैसों के इस्तेमाल का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की।

ग्रामीणों ने वरिष्ठ अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप कर पेयजल संकट दूर करने और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।

फिलहाल अनुदान उपलब्ध नहीं

मादनहिप्परगी के प्रभारी पीडीओ हनमंतराव के अनुसार, खराब बोरवेलों के पंपसेट की मरम्मत के लिए फिलहाल अनुदान उपलब्ध नहीं है। कर वसूली होने के बाद मरम्मत कराई जाएगी।

 

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By Bharat Ki Awaz

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