400 से अधिक घरों में गर्मी से शुरू हुआ जल संकट अब भी बरकरार
4-5 हजार रुपए खर्च कर ठेले खरीदने को मजबूर ग्रामीण
काम पूरा करने के लिए एक महीने का और इंतजार
सुरपुर (योदगीर)। घरों में नल से पानी पहुंचाने की योजना अधूरी है और ग्रामीणों को एक किलोमीटर दूर से पानी ढोना पड़ रहा है। यादगीर जिले के सुरपुर तालुक के हालभावी गांव में 400 से अधिक परिवारों की यही रोजमर्रा की जद्दोजहद है।
सिर पर पानी के मटकी उठाना मुश्किल हुआ तो ग्रामीणों ने अपनी जेब से 4,000 से 5,000 रुपए खर्च कर हाथठेले खरीद लिए। अब सुबह से शाम तक ठेलों पर छह से आठ मटकियां लादकर पानी लाना उनकी मजबूरी है। विडंबना यह है कि घर-घर जलापूर्ति के लिए शुरू की गई जल जीवन मिशन की योजना दो साल बाद भी अधूरी है, जबकि पुरानी पाइपलाइन टूटने से पानी की आपूर्ति भी बंद हो चुकी है।
देवतकल ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले हालभावी गांव की आबादी 2,000 से अधिक है। पिछले साल की गर्मियों से शुरू हुआ जल संकट अब तक दूर नहीं हुआ। गांव से करीब एक किलोमीटर दूर खुले कुएं के पास बने दो टंकियों से ग्रामीण पानी लाते हैं। बिजली गुल होने पर पानी भरने की व्यवस्था भी प्रभावित होती है। ऐसे में महिलाओं, बुजुर्गों और दूसरे ग्रामीणों के लिए पानी जुटाना रोज का कठिन काम बन गया है।
दो साल से अधूरी योजना, पाइपलाइन भी ठप
जल जीवन मिशन के तहत दो साल पहले गांव में जलापूर्ति का काम शुरू हुआ था। योजना के अनुसार खुले कुएं से पानी दो टंकियों में जमा कर पाइपलाइन के जरिए घरों तक पहुंचाया जाना था। लेकिन ठेकेदार आधा काम छोडक़र चला गया। ग्राम पंचायत के अनुदान से चल रही पुरानी पाइपलाइन भी खराब गुणवत्ता के कारण पिछली गर्मियों में जगह-जगह टूट गई। इसके बाद जलापूर्ति बंद हो गई। ग्रामीणों का आरोप है कि धन की कमी का हवाला देकर मरम्मत नहीं कराई गई। विभागों के चक्कर लगाने और ज्ञापन देने के बावजूद समस्या जस की तस है।
अधिकारी ने स्थायी समाधान का भरोसा दिया है। लेकिन हालभावी के ग्रामीणों के लिए फिलहाल राहत का कोई तात्कालिक रास्ता नजर नहीं आता। योजना का उद्देश्य घर-घर पानी पहुंचाना था, मगर हकीकत यह है कि ग्रामीण आज भी ठेलों पर पानी ढो रहे हैं और समाधान के लिए उन्हें एक महीना और इंतजार करना पड़ सकता है।
राज्य किसान संघ की जिला समिति के अध्यक्ष अय्यन्ना जंबलदिन्नी ने आरोप लगाया कि केवल पाइपलाइन का काम पूरा करने पर 3 से 4 लाख रुपए खर्च हो सकते हैं। कम लागत में समस्या सुलझ सकती है तो 13 लाख रुपए की परियोजना और निविदा प्रक्रिया के नाम पर देरी क्यों की जा रही है।
मंजूरी मिली, फिर भी एक महीने का इंतजार
अधूरे काम को पूरा करने के लिए कार्यबल निधि से 13 लाख रुपए की मंजूरी मिली है। लेकिन लागत 5 लाख रुपए से अधिक होने के कारण निविदा प्रक्रिया अपनानी होगी। ऐसे में काम शुरू होने में करीब एक महीने का समय लग सकता है।
–एच.डी. पाटील, सहायक कार्यकारी अभियंता, ग्रामीण जलापूर्ति एवं स्वच्छता विभाग
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