14 करोड़ रुपए का कैथलैब बंद, अब 50 लाख रुपए के अध्ययन पर खर्चबीदर चिकित्सा विज्ञान संस्थान।

बीदर के ब्रिम्स में डेढ़ साल से हृदय रोगियों को इलाज का इंतजार

विशेषज्ञों की नियुक्ति के बजाय पीपीपी मॉडल पर निजी एजेंसी को सौंपने की तैयारी

बीदर। सरकारी अस्पताल में हृदय रोगियों को आधुनिक और किफायती उपचार उपलब्ध कराने के लिए 14 करोड़ रुपए खर्च कर बनाया गया अत्याधुनिक कैथलैब डेढ़ साल से बंद पड़ा है। 50 बिस्तरों की सुविधा वाला यह केंद्र अब तक मरीजों के काम नहीं आ सका है। वजह बताई जा रही है विशेषज्ञ चिकित्सकों और तकनीकी कर्मचारियों की कमी। अब इस समस्या का समाधान सरकारी स्तर पर नियुक्तियां करके निकालने के बजाय कैथलैब को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर चलाने की तैयारी है। इसके संचालन के विकल्पों के अध्ययन पर ही 50 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं।

बीदर चिकित्सा विज्ञान संस्थान (ब्रिम्स) में स्थापित इस केंद्र का उद्देश्य क्षेत्र के हृदय रोगियों को सरकारी व्यवस्था में बेहतर उपचार उपलब्ध कराना था। लेकिन डेढ़ साल बाद भी सुविधा शुरू नहीं होने से मरीजों को निराशा हाथ लग रही है। अब निजी एजेंसी के चयन के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई हैं। उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव के कारण लागू आचार संहिता से चयन प्रक्रिया प्रभावित हुई है। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद एजेंसी चयन को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।

कर्मचारियों की कमी या व्यवस्था की नाकामी

सामाजिक कार्यकर्ता विनय कुमार मालगे ने कैथलैब को पीपीपी मॉडल पर सौंपने की तैयारी पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब केंद्र के निर्माण पर पहले ही 14 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं, तो विशेषज्ञ चिकित्सकों और तकनीकी कर्मचारियों की नियुक्ति कर इसे सरकारी नियंत्रण में ही शुरू किया जाना चाहिए। संचालन के विकल्पों के अध्ययन पर 50 लाख रुपए खर्च करना भी अनुचित है।

मालगे के अनुसार, बीदर शहर में पहले से तीन-चार निजी अस्पताल हृदय रोगों का इलाज कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी कैथलैब शुरू नहीं होने से मरीजों को निजी अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से हैदराबाद, सोलापुर और अन्य शहरों से विशेषज्ञ चिकित्सक तथा तकनीकी कर्मचारी नियुक्त कर केंद्र को जल्द शुरू करने की मांग की।

आचार संहिता के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया

ब्रिम्स के प्रशासनिक अधिकारी प्रकाश के अनुसार, चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के बाद निजी एजेंसी के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। पीपीपी मॉडल पर संचालन के संबंध में रिपोर्ट मिलने के बाद अगला निर्णय लिया जाएगा।

करोड़ों का निवेश, मरीजों को राहत कब

कैथलैब के बंद रहने से सरकारी स्वास्थ्य ढांचे में तैयार सुविधा का लाभ मरीजों तक नहीं पहुंच पा रहा है। अब सवाल यह है कि क्या सरकार विशेषज्ञों की नियुक्ति कर इसे सीधे शुरू करेगी या निजी एजेंसी के चयन और अध्ययन की प्रक्रिया में मरीजों का इंतजार और लंबा होगा।

 

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By Bharat Ki Awaz

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