बागलकोट में पशु चिकित्सा व्यवस्था बेहाल, 55 फीसदी पद खाली

15 लाख से अधिक पशुधन के इलाज का जिम्मा महज 262 कर्मचारियों पर

कई केंद्रों में एक ही चिकित्सक के भरोसे सेवा

बागलकोट। पशुओं का इलाज कर उनकी सेहत बचाने वाला पशुपालन विभाग खुद कर्मचारियों की कमी से बेहाल है। जिले में विभाग के स्वीकृत 589 पदों में से 327 यानी 55 प्रतिशत खाली हैं। नतीजतन, चिकित्सकों को दो-तीन पशु चिकित्सा केंद्रों का जिम्मा संभालना पड़ रहा है और किसानों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है।

पशु चिकित्सकों के 115 स्वीकृत पदों में से 57 भरे हैं, जबकि 58 खाली हैं। बागलकोट तालुक में 13 पशु चिकित्सा अधिकारियों की जगह केवल दो कार्यरत हैं। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारियों के 35 पदों में से 10 और अन्य पशु चिकित्सा अधिकारियों के 50 पदों में से 44 खाली हैं। चतुर्थ श्रेणी के 242 पदों में भी केवल 43 कर्मचारी कार्यरत हैं। संविदा और बाहरी एजेंसी के कर्मचारियों से काम चलाया जा रहा है, लेकिन व्यवस्था सुचारु नहीं हो पा रही है।

जिले में 15.28 लाख से अधिक बड़े और छोटे पशुधन के साथ 17 लाख से अधिक मुर्गियां हैं। इसके बावजूद कई केंद्रों में चिकित्सकों की कमी से पशुओं को समय पर उपचार नहीं मिल रहा। कातरकी, अरकेरे और चिक्कालगुंडी केंद्रों में एक ही चिकित्सक के भरोसे सेवाएं चल रही हैं।

किसान बसप्पा दोड्डमनी के अनुसार, चिकित्सक का इंतजार करना पड़ता है और कई बार निजी डॉक्टरों की मदद लेनी पड़ती है।

जिले में 13 चलित (मोबाइल) पशु चिकित्सा वाहन संचालित हैं, जिससे कुछ राहत मिल रही है।

विभाग के उपनिदेशक एस.एच. करडिगुड्ड ने बताया कि राज्य स्तर पर पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। फिलहाल उपलब्ध कर्मचारियों का पुनर्विन्यास कर उपचार सेवाएं जारी रखी जा रही हैं।

 

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By Bharat Ki Awaz

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