250 बिस्तरों के अस्पताल में डॉक्टरों का अकाल, 30 नर्सें नहीं पहुंचीं
करोड़ों का भवन बना सफेद हाथी
विशेषज्ञों के बिना कई विभाग बेहाल, मंजिलें खाली
गरीब मरीज निजी अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर
शिग्गांव। करोड़ों रुपए खर्च कर बनाया गया अस्पताल, लेकिन मरीजों को इलाज के लिए डॉक्टर नहीं। शिग्गांव के 250 बिस्तरों वाले तालुक सार्वजनिक अस्पताल में विशेषज्ञों और कर्मचारियों की भारी कमी ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है।
तीस नर्सों ने अब तक कार्यभार नहीं संभाला, कई विभाग विशेषज्ञों के बिना चल रहे हैं और भवन की मंजिलें खाली पड़ी हैं। मुफ्त इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले गरीब मरीजों को निजी अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने तो सरकारी छुट्टियों में अस्पताल बंद रहने का आरोप भी लगाया है।
दो साल में बनना था, चार साल में तैयार
पुराने अस्पताल की बदहाली और गंभीर मरीजों को हुब्बल्ली भेजने की मजबूरी दूर करने के लिए 96.5 करोड़ रुपए की लागत से नया अस्पताल बनाया गया। 7 जून 2022 को मंजूरी और 7 अक्टूबर को निर्माण ठेका मिला। काम 24 महीने में पूरा होना था, लेकिन भवन 2026 में तैयार हुआ। अब भवन तो खड़ा है, मगर पर्याप्त डॉक्टरों, कर्मचारियों और उपकरणों के अभाव में मरीजों को अपेक्षित उपचार नहीं मिल रहा।
विशेषज्ञों का टोटा, मंजिलें खाली
त्वचा रोग, हड्डी-जोड़ और कान-नाक-गला सहित कई विभागों में विशेषज्ञों की कमी है। चिकित्सा, शल्य चिकित्सा, बाल रोग, प्रसूति, नेत्र और मनोरोग सेवाएं भी प्रभावित हैं। तीसरी और चौथी मंजिल का बड़ा हिस्सा उपयोग में नहीं है। अस्पताल में महज 20 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी होने से व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव है।
अस्पताल के उद्घाटन के बाद भी करीब 50 करोड़ रुपए के उपकरण और अन्य सुविधाओं के लिए राशि नहीं मिले हैं।
अधिकारियों को जानकारी, समाधान का इंतजार
मुख्य प्रशासनिक अधिकारी डॉ. मल्लिकार्जुन एम. के अनुसार, कर्मचारियों की कमी की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई है। तबादले के बावजूद कुछ डॉक्टरों ने कार्यभार नहीं संभाला, जबकि कुछ ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली या अवकाश लिया।
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