मेंगलूरु की ‘मांड सोभाण’ संस्था का अनूठा अभियान
7,000 से अधिक गायक प्रस्तुत करेंगे 4,500 कोंकणी गीत
मेंगलूरु। कोंकणी भाषा और संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से मेंगलूरु की सांस्कृतिक संस्था ‘मांड सोभाण’ लगातार 12 दिन, 12 घंटे और 12 मिनट तक सामूहिक गायन आयोजित कर विश्व रिकॉर्ड बनाने की तैयारी कर रही है। इसमें देश-विदेश के 7,000 से अधिक गायक भाग लेंगे और करीब 4,500 कोंकणी गीत प्रस्तुत करने का लक्ष्य है।
ऑस्ट्रेलिया, कुवैत, मस्कट और कतर सहित विभिन्न देशों में रहने वाले कोंकणी गायक अभ्यास में जुटे हैं। गोवा के अलावा केरल, मुंबई, बेंगलूरु, मैसूरु, कारवार, कुमटा, उडुपी, चिक्कमगलूरु और शिवमोग्गा के प्रतिभागी भी शामिल होंगे।
300 दल, 4,500 गीत
प्रथम विश्व कोंकणी संगीत महामेला में 300 गायन दल बनाए गए हैं। प्रत्येक दल में 18 से 50 गायक होंगे और उसे लगभग एक घंटे प्रस्तुति का अवसर मिलेगा। खारवी, गुमट, वोव्यो और सिद्धि लोकगीतों के साथ भाषा, संस्कृति, धर्म और प्रकृति से जुड़े गीत भी गाए जाएंगे। हिंदू, मुस्लिम और ईसाई समुदायों सहित विभिन्न कोंकणी भाषी समुदायों के गायक इसमें भाग लेंगे।
गायन जारी रखने के लिए दो मंच
गीतों के बीच विराम रोकने के लिए दो मंच तैयार किए जा रहे हैं। एक दल की प्रस्तुति समाप्त होते ही दूसरा दल गायन शुरू करेगा। बिजली आपूर्ति बाधित होने पर भी कार्यक्रम नहीं रोकने की योजना है। गीतों का संग्रह तैयार कर प्रत्येक गीत को अलग पहचान संख्या दी गई है, ताकि दोहराव से बचा जा सके। हर दल को 16 से 18 गीत प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
पिछला रिकॉर्ड तोडऩे का लक्ष्य
आयोजकों के अनुसार, गुजरात के श्री हरिकृष्ण कीर्तन यज्ञ दल ने 9 से 20 जुलाई 2024 के बीच 11 दिन, 11 घंटे और 11 मिनट तक गायन कर पिछला रिकॉर्ड बनाया था। मांड सोभाण इससे अधिक समय तक लगातार गायन कर नया रिकॉर्ड बनाने का प्रयास करेगी। संस्था ने वर्ष 2008 में भी 1,711 गायकों के साथ 40 घंटे तक गायन आयोजित किया था।
लंदन से होगी निगरानी
आयोजन की रिकॉर्डिंग के लिए छह कैमरे लगाए जाएंगे। आयोजकों के अनुसार, लंदन स्थित संबंधित रिकॉर्ड संस्था के प्रतिनिधि सीधा प्रसारण देखकर कार्यक्रम की निगरानी करेंगे। प्रत्येक दल को प्रस्तुति से पहले राजपत्रित अधिकारियों से अनुमति पत्र पर हस्ताक्षर करवाने होंगे।
संस्था के अध्यक्ष लुवी जे. पिंटो ने बताया कि दिवंगत एरिक ओसारियो की स्मृति में आयोजित इस महामेले का उद्देश्य कोंकणी भाषा, संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं को दुनिया भर में पहुंचाना तथा युवा प्रतिभाओं को मंच देना है। आयोजन पर करीब तीन करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। प्रतिभागियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
रिकॉर्ड के लिए प्रमुख शर्तें केवल गायन मान्य होगा, एकल प्रस्तुति की अनुमति नहीं होगी और मंच से उतरने के बाद कोई गायक दोबारा प्रस्तुति नहीं दे सकेगा।
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