तटीय कर्नाटक के किसानों पर दोहरी मार
उपज में 30 से 45 प्रतिशत गिरावट का अनुमान
खेतों में गिरने लगी तैयार फसल
कोटा (उडुपी)। तटीय कर्नाटक में धान उत्पादक किसानों पर मौसम की दोहरी मार पड़ रही है। दाने भरने के समय पर्याप्त बारिश नहीं होने से धान की पैदावार घट गई है। अब कटाई के वक्त बारिश ने चिंता बढ़ा दी है। खेतों में तैयार फसल गिरने लगी है, जिससे कटाई और धान को सुरक्षित रखने में मुश्किलें आ रही हैं।
प्रति एकड़ उपज 20 से घटकर 15 क्विंटल तक
कोटा के आसपास कुछ क्षेत्रों में धान की कटाई शुरू हो गई है। सामान्य परिस्थितियों में एमओ-4 किस्म से प्रति एकड़ 18 से 20 क्विंटल उपज मिलती थी, लेकिन इस बार यह घटकर 13 से 15 क्विंटल रहने का अनुमान है। दाने भरने के अहम चरण में पानी की कमी के कारण बालियों में अपेक्षित दाने नहीं बन पाए। कुल पैदावार में 30 से 45 प्रतिशत तक गिरावट की आशंका है।
खेती की तैयारी, रोपाई, खाद, मजदूरी और कटाई पर खर्च करने के बाद कम उपज से किसानों की आमदनी प्रभावित होगी। कई किसानों के लिए लागत निकालना भी मुश्किल हो सकता है।
अगले 15-20 दिन अहम
किसानों को उम्मीद थी कि अगले 15 से 20 दिनों में अधिकांश खेतों की कटाई पूरी हो जाएगी। लेकिन बारिश जारी रहने से कटाई में देरी और धान सुखाने की समस्या बढ़ सकती है। खेतों में गिरती फसल की कटाई कठिन होती है और दानों की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है।
मुआवजे और सहायता की मांग
किसानों का कहना है कि खेती की बढ़ती लागत और घटती पैदावार के बीच सरकारी सहायता पर्याप्त नहीं है। धान उत्पादकों को सूखा राहत और प्रोत्साहन राशि में अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिलने की शिकायत भी की जा रही है। मौसम की मार से छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।
किसानों की मुश्किलें बढ़ी
धान में दाने भरने के समय पर्याप्त पानी मिलना बेहद जरूरी है। इस अवधि में पानी की कमी से पैदावार घटती है और बालियों को नुकसान पहुंचता है। इस बार भी यही स्थिति बनी है, जिससे किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
–जगन्नाथ मेंडन कोटा, वरिष्ठ किसान
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