मोलकाल्मुरु में 50 प्रतिशत से अधिक फसलें बर्बाद, खेतों से लेकर पशुपालन तक पर मार
सूखाग्रस्त घोषित होने के एक महीने बाद भी राहत का इंतजार
चित्रदुर्ग। मानसून की बेरुखी ने मोलकाल्मुरु तालुक के किसानों को दोहरी मार दी है। बारिश के अभाव में करीब 21 करोड़ रुपए की फसल बर्बाद होने का अनुमान है, वहीं अब पशुओं के लिए चारा जुटाना भी मुश्किल हो गया है। खेतों में खड़ी फसलें सूख चुकी हैं और पशुपालक महंगे दाम पर पड़ोसी आंध्र प्रदेश से हरा चारा खरीदने को मजबूर हैं। तालुक को सूखाग्रस्त घोषित हुए एक महीना बीतने के बावजूद चारा केंद्र और गोशालाएं शुरू नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। कई गांवों में पेयजल संकट की आशंका भी गहराने लगी है।
तालुक में सिंचाई के स्थायी साधनों की कमी के कारण खेती मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर है। इस वर्ष बुवाई के बाद पर्याप्त बारिश नहीं होने से फसलें खेतों में ही सूख गईं। कृषि विभाग ने नुकसान का आकलन कर राज्य सरकार को रिपोर्ट भेजी है।
किसान गोविंदप्पा ने बताया कि देवसमुद्र क्षेत्र में बारिश इतनी कम हुई कि कई खेतों में फसलें ठीक से अंकुरित भी नहीं हो सकीं। कसबा क्षेत्र में पौधे कुछ समय तक बढ़े, लेकिन बाद में बारिश नहीं होने से सूख गए। एक ही फसल पर निर्भर किसानों के सामने अब आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
आंध्र प्रदेश से खरीद रहे हरा चारा
पशुपालक पालय्या ने बताया कि फसल बर्बाद होने के साथ खेतों से मिलने वाला चारा भी खत्म हो गया है। किसान आंध्र प्रदेश के सिंचित क्षेत्रों से मूंगफली, मक्का और ज्वार की हरी फसल खरीदकर पशुओं को खिला रहे हैं। गर्मी बढऩे से जंगलों में भी चारा और पानी कम हो गया है। ऐसे में पशुओं को चराना और उनका पेट भरना कठिन होता जा रहा है।
सूखाग्रस्त घोषित, फिर भी राहत नहीं
किसान संघ के जिला इकाई अध्यक्ष मरलहल्ली रविकुमार ने कहा कि सूखाग्रस्त घोषित होने के एक महीने बाद भी चारा केंद्र और गोशालाएं शुरू नहीं हुई हैं। उन्होंने बीजी केरे क्षेत्र में चारे के अभाव में देवताओं के नाम पर छोड़े गए बैलों की मौत होने का दावा भी किया। उनके अनुसार, कई गांवों में पेयजल की समस्या सामने आने लगी है।
फसल बीमा के तहत प्रति एकड़ 6,500 रुपए की राहत देने संबंधी रिपोर्ट भी जिलाधिकारी कार्यालय के माध्यम से राज्य सरकार को भेजी गई है, लेकिन अनुदान जारी नहीं हुआ है। किसान संगठनों ने तत्काल चारा केंद्र और गोशालाएं शुरू करने, पेयजल उपलब्ध कराने तथा ग्रामीणों को रोजगार देने की मांग की है।
32 हजार हेक्टेयर भूमि, खेती पर सूखे की चोट
कृषि विभाग के सहायक निदेशक मंजुनाथ ने बताया कि तालुक में कुल 32 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि है। इस वर्ष 16,700 हेक्टेयर में मूंगफली, 2,420 हेक्टेयर में अरहर तथा शेष क्षेत्र में कपास, रागी, उड़द, अरंडी और कंगनी की बुवाई की गई थी। अधिकांश फसलों में 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ है। निर्धारित मानकों के आधार पर करीब 21 करोड़ रुपए की फसल क्षति का आकलन कर रिपोर्ट सरकार को भेजी गई है।
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