ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत पर 64 देशों से हुए साइबर हमलेउदय शंकर पुराणिक।

अमेरिकी कंपनी के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ उदय शंकर पुराणिक का दावा

स्मार्ट टीवी को बताया घर का ‘चोर कान’, साइबर ठगी से हर साल 25 हजार करोड़ रुपए का नुकसान

हावेरी। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत को निशाना बनाने के लिए 64 देशों से साइबर हमले किए गए थे। हालांकि, भारतीय साइबर सुरक्षा व्यवस्था की मजबूती के चलते हमलावर अपने मंसूबों में बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सके। इस दौरान जम्मू-कश्मीर के एक गांव के स्कूल की वेबसाइट को ही हैक किया जा सका। यह महत्वपूर्ण खुलासा अमेरिका की कंपनी थेटा डायनामिक्स के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) एवं साइबर सुरक्षा विभाग के निदेशक उदय शंकर पुराणिक ने किया।

हावेरी विश्वविद्यालय में आयोजित एक व्याख्यान कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में निदेशक पुराणिक ने कहा कि भारत को आर्थिक रूप से कमजोर करने के उद्देश्य से पड़ोसी देशों से समय-समय पर साइबर हमले किए जाते हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी भारत के डिजिटल ढांचे को निशाना बनाने के प्रयास हुए, लेकिन साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में देश की बढ़ती क्षमता के कारण हमलावरों को अपेक्षित सफलता नहीं मिली।

साइबर अपराध से हर साल 25 हजार करोड़ रुपए का नुकसान

निदेशक पुराणिक के अनुसार, केंद्र सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक देश में बढ़ते साइबर अपराधों के कारण प्रतिवर्ष लगभग 25 हजार करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान हो रहा है। साइबर आतंकियों की नजर केवल बैंक खातों और व्यक्तिगत जानकारियों पर ही नहीं, बल्कि पानी, बिजली और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी सुविधाओं पर भी है। इन व्यवस्थाओं को बाधित कर देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की साजिशें लगातार होती रहती हैं। पुराणिक ने बताया कि थाईलैंड और कंबोडिया में कुछ आपराधिक गिरोह बड़े नेटवर्क के माध्यम से साइबर ठगी और अन्य संगठित अपराधों को अंजाम दे रहे हैं। ये गिरोह सोशल मीडिया के जरिए भारतीय नागरिकों से संपर्क करते हैं और उन्हें विदेश बुलाकर बंधक बनाने के बाद आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए मजबूर करते हैं। ऐसे नेटवर्क में फंसे भारत के लगभग 8,000 नागरिकों को अब तक सुरक्षित बचाया जा चुका है।

बैंक खाते किराए पर देना पड़ सकता है भारी

पुराणिक ने कहा कि कुछ लोग पैसे के लालच में अपने बैंक खाते दूसरों को किराये पर दे देते हैं। साइबर अपराधी इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए करते हैं। ऐसे खाताधारक भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं। पुराणिक ने दावा किया कि अमेरिका के बाद भारत में साइबर अपराधों की बड़ी चुनौती सामने आ रही है। साइबर ठगी से जुड़े मामलों में 130 देशों से सूचनाएं मांगी गई थीं, लेकिन सभी देशों ने अपेक्षित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। पुराणिक ने कहा कि एआई के कारण बड़े पैमाने पर नौकरियां समाप्त हो जाएंगी, ऐसा निश्चित रूप से कहना अभी उचित नहीं है। आने वाले समय में तकनीकी बदलावों के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। उन्होंने सलाह दी कि उपभोक्ताओं को अपने स्मार्ट टीवी और रिमोट में मौजूद अनावश्यक स्मार्ट सुविधाओं को बंद रखना चाहिए तथा गोपनीयता संबंधी सेटिंग्स की नियमित जांच करनी चाहिए।

बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी हो सकती है साइबर ठगी!

पुराणिक ने बताया कि अब धोखाधड़ी के लिए केवल इंटरनेट कनेक्शन या पारंपरिक एपीके फाइल पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं रह गई है। फोटो भेजने के माध्यम से मोबाइल में एप्लिकेशन इंस्टॉल कराने जैसी नई तकनीकों के इस्तेमाल की आशंका भी सामने आ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि नागरिकों के नाम पर जारी सिम कार्ड नंबर और अन्य निजी जानकारियां तीसरे पक्ष तक पहुंच रही हैं। उनके अनुसार, एक सिम कार्ड नंबर की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग 50 डॉलर यानी करीब 4,745 रुपये तक बताई जा रही है। यह स्थिति व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। पुराणिक ने कहा कि इस क्षेत्र में लगभग 50 लाख पद खाली होने का अनुमान है। स्नातक युवा आवश्यक तकनीकी कौशल हासिल कर इस क्षेत्र में अपना करियर बना सकते हैं।

 

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By Bharat Ki Awaz

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