धान के भाव में उछाल, किसानों को मिल रहे 4,500 रुपए प्रति क्विंटल तकदावणगेरे एपीएमसी में धान के ढेर की जांच करता किसान।

भद्रा बांध से पानी नहीं मिलने के कारण दावणगेरे में धान की खेती 63,800 से घटकर 17,000 हेक्टेयर

कम उत्पादन और चावल की बढ़ती कीमतों से बाजार में तेजी

दावणगेरे। कर्नाटक के दावणगेरे जिले में इस साल मानसून के दौरान भद्रा जलाशय से सिंचाई के लिए पानी नहीं छोड़े जाने के कारण धान की खेती बुरी तरह प्रभावित हुई है। जिले में जहां सामान्यत: करीब 63,800 हेक्टेयर में धान की खेती होती है, वहीं इस बार केवल 17,000 हेक्टेयर में ही फसल लग पाई। हालांकि, सिंचाई के वैकल्पिक साधनों से धान उगाने वाले किसानों को इस बार बाजार में बेहतर भाव मिल रहा है। कृषि उपज मंडी में धान का अधिकतम भाव 4,503 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है।

पिछले कई वर्षों से 2,000 से 2,800 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास धान बेचने वाले किसानों को इस बार लगभग दोगुना भाव मिल रहा है। मंडी में बुधवार को धान 3,999 रुपए न्यूनतम, 4,422 रुपए अधिकतम और 4,292 रुपए प्रति क्विंटल औसत भाव पर बिका। एक से 28 अक्टूबर तक मंडी में कुल 24,673 क्विंटल धान की आवक हुई। पिछले साल अक्टूबर में अधिकतम भाव केवल 2,624 रुपए प्रति क्विंटल था।

खेती का रकबा घटा, भाव में तेजी

जिले में मुख्य रूप से आरएनआर किस्म का धान उगाया जाता है। भद्रा जलाशय से पानी नहीं मिलने के कारण किसानों को बोरवेल, नदी और तालाबों के पानी पर निर्भर रहना पड़ा। इस बार हरिहर तालुक में सबसे अधिक करीब 9,000 हेक्टेयर में धान की खेती हुई है।

राणेबेन्नूर तालुक के सोमलापुर गांव के किसान राजू ओणरोट्टी ने नदी के पानी से धान उगाया और 60 बोरी उपज बेचकर 4,366 रुपए प्रति क्विंटल का भाव पाया। वहीं, कोननतंबिगे गांव के किसान आंजनेय बेलूर ने बताया कि पिछले साल उन्हें 2,300 रुपए प्रति क्विंटल मिले थे, जबकि इस बार उनकी उपज 4,422 रुपए में बिकी।

चावल की कीमतों से बढ़ी खरीदारी

मंडी व्यापारी दोग्गल्ली बसवराज के अनुसार, राज्य में चावल की कीमतें बढऩे से धान खरीदने वालों की संख्या बढ़ी है। आगे कीमतें और बढऩे की आशंका में व्यापारी धान का भंडारण कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इस बार फसल में रोग का प्रकोप कम रहने से पैदावार भी अच्छी हुई है। सीमित क्षेत्र में खेती होने और अन्य क्षेत्रों में उत्पादन प्रभावित होने से भाव को सहारा मिल रहा है।

व्यापारी ने कहा कि तुंगभद्रा जलाशय में नए द्वार लगाए जाने के कारण पिछले वर्ष रबी मौसम में किसानों को पानी नहीं मिल पाया था। आंध्र प्रदेश के नागार्जुन सागर जलाशय में भी पानी की कमी के कारण धान की खेती प्रभावित होने से बाजार में तेजी आई है। आने वाले दिनों में दूसरे क्षेत्रों के व्यापारी भी यहां धान खरीदने पहुंच सकते हैं।

गर्मी की फसल के लिए पानी का कार्यक्रम जारी करने की मांग

किसान नेता बी.एम. सतीश कोलेनहल्ली ने मांग की है कि भद्रा जलाशय से गर्मी की फसल के लिए पानी छोडऩे का कार्यक्रम अभी जारी किया जाए। उन्होंने नहरों से झाडिय़ां हटाने और गाद निकालने की मांग भी उठाई। उनका आरोप है कि जलग्रहण क्षेत्र में पर्याप्त बारिश होने के बावजूद जलाशय में पानी की आवक के आंकड़ों को लेकर संदेह है। इस संबंध में वे जिलाधिकारी को ज्ञापन देने की तैयारी कर रहे हैं।

जिले में धान की रोपाई देर से होने के कारण अभी कटाई शुरू नहीं हुई है। किसान शिवज्जर करियप्पा ने बताया कि उन्होंने सूलेकेरे और श्यागले नालों तथा बोरवेल के पानी से 10 एकड़ में धान उगाया है। उनकी फसल की कटाई करीब 15 दिन बाद होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि तब तक बाजार में यही भाव बना रहे, ताकि पानी की कमी के बीच खेती पर किया गया खर्च निकल सके और किसानों को राहत मिले।

 

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By Bharat Ki Awaz

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