विजयेंद्र-रेड्डी-श्रीरामुलु पर हमला
‘बल्लारी चलो’ पदयात्रा को बताया केजेपी, बीएसआर और केआरपीपी की ‘पश्चाताप यात्रा’
मंत्री बोले- पुराने राजनीतिक वैमनस्य वाले नेता अब भाजपा के रक्षक बनने का कर रहे दिखावा
बल्लारी/कोप्पल। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र के नेतृत्व में चल रही ‘बल्लारी चलो’ पदयात्रा को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मंत्री शिवराज तंगडगी ने भाजपा के तीन प्रमुख नेताओं—विजयेंद्र, गंगावती विधायक गाली जनार्दन रेड्डी और पूर्व विधायक बी. श्रीरामुलु पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए हैं। तंगडगी ने दावा किया कि ये तीनों नेता पुराने राजनीतिक वैमनस्य के चलते कभी भाजपा से अलग होकर अपनी-अपनी पार्टियां बनाने वाले थे और अब भाजपा के रक्षक बनने का दिखावा कर रहे हैं।
तंगडगी ने सोशल मीडिया पोस्ट में ‘बल्लारी चलो’ को भाजपा की सामान्य पदयात्रा के बजाय ‘केजेपी, बीएसआर और केआरपीपी की साजिश यात्रा’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि तीनों नेताओं ने अतीत में भाजपा के खिलाफ अलग-अलग राजनीतिक मंच खड़े किए और अब भाजपा के लिए पदयात्रा निकालना राजनीतिक विडंबना है।

तीनों नेताओं के पुराने राजनीतिक अध्याय का हवाला
तंगडगी ने कहा कि बी.एस. येडियूरप्पा के नेतृत्व में भाजपा से अलग होकर कर्नाटक जनता पक्ष (केजेपी) बनाया गया था, जबकि जनार्दन रेड्डी ने कल्याण राज्य प्रगति पक्ष (केआरपीपी) और श्रीरामुलु ने बीएसआर कांग्रेस के माध्यम से अलग राजनीतिक राह अपनाई थी। बाद में ये राजनीतिक मंच भाजपा के साथ फिर जुड़ गए।
इसी पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए मंत्री ने सवाल उठाया कि यदि इन दलों को उस समय व्यापक जनसमर्थन मिल गया होता तो क्या ये नेता दोबारा भाजपा में लौटते?
‘अब भाजपा से अचानक प्रेम क्यों?’
तंगडगी ने अपने बयान में जनार्दन रेड्डी और श्रीरामुलु के पुराने राजनीतिक फैसलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि तीनों नेताओं का इतिहास अपने ही पूर्व राजनीतिक सहयोगियों के खिलाफ चुनावी मुकाबले का रहा है। मंत्री ने सवाल किया कि हाल में एक-दूसरे के खिलाफ सार्वजनिक राजनीतिक बयान देने वाले नेता अब अचानक भाजपा के लिए एकजुट होकर पदयात्रा क्यों कर रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा कार्यकर्ताओं को इन नेताओं की राजनीतिक भूमिका को लेकर सवाल उठाने चाहिए और आरोप लगाया कि पदयात्रा के पीछे पार्टी हित से ज्यादा व्यक्तिगत राजनीतिक हित हो सकते हैं।
‘यात्रा का लक्ष्य स्पष्ट नहीं’
तंगडगी ने दावा किया कि पदयात्रा का उद्देश्य स्पष्ट नहीं है और भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं की कथित दूरी को भी उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में पेश किया।
‘बल्लारी चलो’ पदयात्रा को लेकर भाजपा इसे पार्टी की राजनीतिक गतिविधि के रूप में आगे बढ़ा रही है, जबकि कांग्रेस की ओर से इसे लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में तंगडगी के आरोपों ने कर्नाटक की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
सवाल बरकरार
क्या तंगडगी के आरोपों में राजनीतिक तथ्य हैं या यह महज कांग्रेस का भाजपा पर हमला है? इसका जवाब संबंधित भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया और पदयात्रा के आगे के राजनीतिक घटनाक्रम से ही स्पष्ट होगा।
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