बढ़ते यातायात जाम और बेतरतीब पार्किंग से राहत के लिए बेंगलूरु मॉडल अपनाने की मांग
हुब्बल्ली। वाणिज्यिक नगरी हुब्बल्ली में बढ़ती यातायात समस्या और सडक़ों पर बेतरतीब वाहन पार्किंग से राहत दिलाने के लिए अब बेंगलूरु की तर्ज पर सडक़ पार्किंग शुल्क लागू करने की मांग उठने लगी है।
नागरिकों का कहना है कि पुराने शहर में अधिकांश व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और मकानों में पर्याप्त पार्किंग सुविधा नहीं होने के कारण मुख्य सडक़ों और बाजार क्षेत्रों में दिनभर दोनों ओर वाहन खड़े रहते हैं।
सडक़ें संकरी, जाम बढ़ा
सडक़ों के दोनों ओर वाहनों की कतार लगने से पहले से संकरी सडक़ें और संकरी हो जाती हैं। इससे यातायात के साथ पैदल यात्रियों की आवाजाही भी प्रभावित होती है। कई बार एंबुलेंस और दमकल वाहनों को भी रास्ता मिलने में परेशानी होती है।
नागरिकों के अनुसार, मुफ्त में सडक़ किनारे वाहन खड़ा करने की आदत के कारण लोग शुल्क देकर निर्धारित पार्किंग स्थल का उपयोग करने से बचते हैं। कई स्थानों पर पार्किंग की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद सडक़ पर वाहन छोडऩे की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
शुल्क से कम हो सकती है अव्यवस्थित पार्किंग
बेंगलूरु, पुणे और मुंबई की तरह हुब्बल्ली में भी प्रति घंटे निर्धारित शुल्क लागू करने से अनावश्यक रूप से सडक़ पर वाहन खड़े करने वालों की संख्या कम हो सकती है। इससे हुब्बल्ली-धारवाड़ महानगर निगम को अतिरिक्त राजस्व भी मिल सकता है, जिसका उपयोग सार्वजनिक पार्किंग स्थल और सडक़ रखरखाव में किया जा सकता है।
नागरिकों और व्यापारी संगठनों के पदाधिकारियों ने पहले गोकुल रोड, कोप्पीकर रोड, स्टेशन रोड, देशपांडे नगर और पुराने कोर्ट रोड जैसे अधिक भीड़ वाले क्षेत्रों में इसे पायलट परियोजना के रूप में लागू करने का सुझाव दिया है।
बहुमंजिला पार्किंग की भी जरूरत
व्यवस्था लागू करने से पहले निर्धारित पार्किंग स्थल, डिजिटल भुगतान, सीसीटीवी और जनजागरूकता की व्यवस्था जरूरी होगी। पुराने शहर में जगह की कमी को देखते हुए बहुमंजिला पार्किंग भवन बनाने की आवश्यकता भी जताई गई है।
ग्रेटर बेंगलूरु क्षेत्र (जीबीए) के प्रस्तावित मसौदे में भी सडक़ पर पार्किंग शुल्क, पार्किंग परमिट, ऑफ-स्ट्रीट पार्किंग बढ़ाने और अत्यधिक व्यस्त सडक़ों पर पार्किंग नियंत्रित करने जैसे प्रावधानों पर जोर दिया गया है।
बेंगलूरु जीबीए मॉडल की व्यवस्था लागू करें
दिन-प्रतिदिन वाहनों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन सडक़ें नहीं बढ़ रहीं। शहर की कई सडक़ों का आधा हिस्सा वाहनों ने घेर लिया है। यातायात समस्या के समाधान के लिए सडक़ पर खड़े वाहनों से शुल्क लेने की बेंगलूरु जीबीए मॉडल की व्यवस्था हुब्बल्ली-धारवाड़ महानगर निगम में भी लागू करना उचित होगा।
–डॉ. एम.सी. सिंधूर, सामाजिक चिंतक
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