तीन वर्षों में 10,710 विद्यार्थी स्कूल छोड़ गएतीन वर्षों में 10,710 विद्यार्थी स्कूल छोड़ गए

कलबुर्गी में सर्वाधिक ड्रॉपआउट, गरीबी और बाल विवाह मुख्य कारण

दावणगेरे। राज्य सरकार द्वारा मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन), मुफ्त पुस्तकें और जूते जैसी विविध जनकल्याणकारी सुविधाएं उपलब्ध कराने के बावजूद, पिछले तीन वर्षों में हाई स्कूल स्तर पर 10,710 विद्यार्थी शिक्षा से वंचित हो गए हैं। पढ़ाई छोडऩे वाले इन विद्यार्थियों में 6,523 बालक और 4,187 बालिकाएं शामिल हैं।

ड्रॉपआउट का वर्षवार विवरण

शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023-24 शैक्षणिक वर्ष में सर्वाधिक 5,614 विद्यार्थियों ने स्कूल छोड़ा।
वर्ष 2024-25 में कुछ सुधार हुआ और संख्या घटकर 2,363 रह गई।
वर्ष 2025-26 के दौरान संख्या में पुन: उछाल आया और 2,733 बच्चों ने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी।

कलबुर्गी जिला सबसे अधिक प्रभावित

ड्रॉपआउट के मामलों में कलबुर्गी जिला शीर्ष पर रहा, जहां बीते तीन वर्षों में ही 2,500 से अधिक बच्चे शिक्षा की मुख्यधारा से दूर हो गए। केवल वर्ष 2023-24 में ही यहां 1,166 बालकों और 913 बालिकाओं ने स्कूल छोड़ दिया। कलबुर्गी के अतिरिक्त कोप्पल, यादगीर, चामराजनगर, दावणगेरे, विजयनगर, बागलकोटे और चिक्कमगलूरु जिलों में भी सैकड़ों बच्चों द्वारा पढ़ाई बीच में छोडऩे के चिंताजनक आंकड़े दर्ज किए गए हैं।

ड्रॉपआउट के मुख्य कारण

अध्ययन में सामने आया है कि ग्रामीण अंचलों में व्याप्त भीषण गरीबी के कारण माता-पिता अपने बच्चों को शिक्षा दिलाने के बजाय मजदूरी के काम में लगा देते हैं। इसके साथ ही, सामाजिक कुप्रथा बाल विवाह भी बालिकाओं की असमय पढ़ाई छूटने का एक बड़ा कारण है। इसके अतिरिक्त, सुदूर क्षेत्रों में परिवहन साधनों का अभाव और आजीविका की तलाश में माता-पिता का लगातार पलायन करना भी इस समस्या को बढ़ा रहा है।

पुन: मुख्यधारा में लाने की सरकारी पहल

स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री एस. मधु बंगारप्पा ने इस स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि विभाग द्वारा प्रतिवर्ष व्यापक सर्वेक्षण कराकर ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान की जाती है और उन्हें पुन: औपचारिक शिक्षा से जोड़ा जाता है। 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों को राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआइओएस) एवं राज्य मुक्त विद्यालयों में दाखिला दिलाकर मैट्रिक व सेकेंडरी परीक्षाओं में सम्मिलित कराने के विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

 

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By Bharat Ki Awaz

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