ओवरलोडिंग, खराब रखरखाव और अवैध सामान ढुलाई पर उठे सवाल
मेंगलूरु. कर्नाटक में पिछले चार महीनों के दौरान पांच बसों में आग लगने की घटनाओं ने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। ताजा मामला 15 मई की रात सामने आया, जब मेंगलूरु से बेंगलूरु जा रही एक निजी स्लीपर बस हासन जिले के शांतिग्राम के पास आग की चपेट में आ गई। चालक और कर्मचारियों की सतर्कता से बस में सवार 36 यात्रियों की जान बच गई।
विशेषज्ञों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि अत्याधुनिक बसों के रखरखाव में लापरवाही, ओवरलोडिंग और अवैध सामान ढुलाई जैसी समस्याएं लगातार ऐसे हादसों को जन्म दे रही हैं।
विधान परिषद में भी उठ चुका है मुद्दा
निजी बसों में नियमों के विरुद्ध माल ढुलाई और उससे होने वाले अग्निकांड का मुद्दा विधान परिषद सदस्य किशोर कुमार पुत्तूर ने सदन में भी उठाया था। बावजूद इसके, सरकार और संबंधित विभागों की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण ऐसी घटनाएं लगातार जारी हैं।
आधुनिक बसों में बढ़ा शॉर्ट सर्किट का खतरा
नई डिजाइन की लग्जरी बसों में हेडलाइट, इंडिकेटर, टॉप लाइट, मोबाइल चार्जर, सीट नंबर लाइट और एयर कंडीशनिंग जैसी कई इलेक्ट्रॉनिक सुविधाएं होती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इनका नियमित रखरखाव नहीं होने से शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ जाता है।
इसके अलावा कई निजी बसों में यात्रियों के साथ भारी मात्रा में फूल, फल और अन्य सामान भी लादा जा रहा है। अधिक वजन के कारण टायर अधिक गर्म होकर फट सकते हैं, जिससे आग लगने की आशंका बढ़ जाती है। वहीं इंजन की खराब मेंटेनेंस भी हादसों की बड़ी वजह मानी जा रही है।
बसों में हो रही अवैध सामान ढुलाई
मेंगलूरु-बेंगलूरु और अन्य लंबी दूरी के रूटों पर चलने वाली कई निजी बसों में यात्रियों के अलावा व्यावसायिक सामान भी ले जाया जा रहा है। आरोप है कि जीएसटी चोरी के उद्देश्य से कुछ बसों में गैस सिलेंडर, पेंट और अन्य ज्वलनशील सामग्री तक ढोई जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय और पुलिस की अनदेखी के कारण यह अवैध गतिविधि लगातार बढ़ रही है।
घाट मार्गों पर और बढ़ जाता है खतरा
मेंगलूरु-बेंगलूरु, मेंगलूरु-शिवमोग्गा, मेंगलूरु-चिक्कमगलूरु तथा मेंगलूरु-मडिकेरी-मैसूर मार्गों पर बसें कठिन घाट सडक़ों से होकर गुजरती हैं। ऐसे में यात्रियों के साथ अतिरिक्त सामान ले जाना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
चार महीनों में बसों में आग की प्रमुख घटनाएं
27 जनवरी को निट्टूर से बेंगलूरु जा रही ‘अन्नपूर्णेश्वरी’ निजी स्लीपर बस शिवमोग्गा जिले के होसनगर के पास जल गई। बस में 40 यात्री सवार थे।
6 फरवरी को नेलमंगला के हनुमंतपुर गेट के पास 40 यात्रियों वाली बस में आग लग गई। सभी सुरक्षित बच गए।
27 मार्च को बेंगलूरु से शिवमोग्गा जा रही केएसआरटीसी बस में आग लगी। 21 यात्री सुरक्षित निकाले गए।
5 मई को बेंगलूरु से गदग जा रही केएसआरटीसी बस हावेरी जिले के राणेबेन्नूर के पास जल गई। बस में 17 यात्री थे।
16 मई को मेंगलूरु से बेंगलूरु जा रही निजी बस हासन के शांतिग्राम के पास आग की चपेट में आ गई। 36 यात्री सुरक्षित बच गए।
हासन बस हादसा कैसे हुआ?
जानकारी के अनुसार उडुपी से शुक्रवार रात 9 बजे निकली बस मेंगलूरु होते हुए बेंगलूरु जा रही थी। हासन के शांतिग्राम के पास बस के टायर से जलने की गंध आने लगी। चालक ने तुरंत बस रोकी तो देखा कि टायर फट चुका है और आग फैलने लगी है। चालक और परिचालकों ने तुरंत यात्रियों को बाहर निकाला, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
बस मालिक रशीद के अनुसार यात्रियों का सामान भी सुरक्षित बचा लिया गया।
खतरनाक सामान ढोने वाली बसों के परमिट रद्द हों
विधान परिषद सदस्य किशोर कुमार पुत्तूर ने कहा कि लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद सरकार गंभीर नहीं है। उन्होंने मांग की कि रात में चलने वाली सभी निजी बसों की सख्ती से जांच करनी चाहिए और खतरनाक सामान ढोने वाली बसों के परमिट रद्द करने चाहिए।
दक्षिण कन्नड़ बस मालिक संघ के पूर्व अध्यक्ष दिलराज आल्वा ने कहा कि आधुनिक बसों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की संख्या अधिक होने के कारण छोटी सी चिंगारी भी पूरे वाहन को आग की चपेट में ले लेती है। उन्होंने बस मालिकों और अधिकारियों से यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की।
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