आधार की गलती बनी मुसीबत
गृहलक्ष्मी योजना का सहारा
अधिकारियों के चक्कर काटने के बाद भी नहीं मिला न्याय
बागलकोट. सरकारी पेंशन योजनाओं के बावजूद एक वृद्ध महिला का जीवन संघर्ष और बेबसी की कहानी सामने आई है। रबकवि-बनहट्टी तालुक के तेरदाल स्थित देवराजनगर में रहने वाली 84 वर्षीय कुतिजाबी राजेसाब पठायत पिछले एक साल से पेंशन के लिए दर-दर भटक रही हैं, लेकिन अब तक उन्हें राहत नहीं मिली है।
आधार की गलती से रुकी पेंशन
कुतिजाबी की वास्तविक उम्र 84 वर्ष है, लेकिन उनके आधार कार्ड में उम्र 48 वर्ष दर्ज हो गई है। इसी तकनीकी त्रुटि के कारण उनकी 1200 रुपए मासिक पेंशन पिछले एक वर्ष से बंद कर दी गई है।
अधिकारियों के चक्कर, फिर भी निराशा
पेंशन दोबारा शुरू करवाने के लिए उन्होंने कई बार आवेदन किया और रबकवि-बनहट्टी के सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाए, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी।
मेहनत कर चल रहा जीवन
पहले वे बाजार में सब्जियां बेचकर अपना जीवन यापन करती थीं, लेकिन अब बढ़ती उम्र के कारण यह संभव नहीं रहा। वर्तमान में वे घरों में बर्तन धोने का काम कर किसी तरह अपना गुजारा कर रही हैं। रोजमर्रा के खर्च और दवाइयों के लिए भी उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं हैं।
गृहलक्ष्मी योजना बनी सहारा
वर्तमान में राज्य सरकार की गारंटी योजना ‘गृहलक्ष्मी’ से मिलने वाली सहायता ही उनके जीवन का एकमात्र सहारा है। कुतिजाबी का कहना है कि इसी मदद से उनका किसी तरह जीवन चल रहा है।
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