‘आर्थिक व्यवस्था चौपट’बागलकोट में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई।

राज्य पर बढ़ रहा कर्ज, जनता से किया गया वादा टूटा

बोम्मई का सिद्धरामय्या सरकार पर तीखा हमला

कृष्णा ऊपरी परियोजना के लिए वादे के मुकाबले कम बजट आवंटन का आरोप

बागलकोट. सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने सिद्धरामय्या सरकार पर राज्य की आर्थिक व्यवस्था को “पूरी तरह से बिगाडऩे” का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है।

बागलकोट में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बोम्मई ने कहा कि सरकार ने बड़े-बड़े वादे किए, लेकिन बजट में पर्याप्त प्रावधान नहीं कर जनता के साथ अन्याय किया है।

बोम्मई ने विशेष रूप से कृष्णा ऊपरी बांध (यूकेपी) का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार ने इस परियोजना के लिए हर साल 18,000 करोड़ रुपए देने का आश्वासन दिया था, लेकिन बजट में मात्र 3,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया। उन्होंने इसे क्षेत्र के किसानों और विस्थापितों के साथ “धोखा” करार दिया।

उन्होंने कहा कि सरकार ने जनता की आंखों में धूल झोंकने का काम किया है। 18,000 करोड़ रुपए देने की घोषणा कर मात्र 3,000 करोड़ रुपए रखना पूरी तरह से विश्वासघात है। इससे प्रभावित परिवारों को न्याय नहीं मिल पाएगा।

बोम्मई ने आरोप लगाया कि राज्य की वित्तीय स्थिति लगातार बिगड़ रही है और सरकार अब तक करीब 4 लाख करोड़ रुपए का कर्ज ले चुकी है। आगामी बजटों में यह कर्ज 6-7 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने की आशंका जताते हुए उन्होंने इसे “असंयमित वित्तीय प्रबंधन” बताया।

केंद्र सरकार की भूमिका का उल्लेख करते हुए बोम्मई ने कहा कि 15वें वित्त आयोग के तहत राज्य को पहले की तुलना में अधिक अनुदान मिला है। रेलवे और राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए भी पहले से कई गुना अधिक राशि दी जा रही है, जिससे विकास कार्यों को गति मिली है।

उन्होंने जल जीवन मिशन सहित कई योजनाओं के क्रियान्वयन में भी राज्य सरकार की विफलता का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि केंद्र द्वारा बुलाई गई महत्वपूर्ण बैठकों में मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति राज्य हितों की अनदेखी दर्शाती है।

बोम्मई ने दावा किया कि बागलकोट उपचुनाव में जनता सरकार को करारा जवाब देगी। उन्होंने कहा कि पिछड़े वर्ग, दलित, किसान और आम जनता “प्रजाशक्ति” के रूप में एकजुट होकर सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ खड़ी होगी।

कुल मिलाकर, बोम्मई के आरोपों ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, जहां एक ओर वित्तीय प्रबंधन और विकास कार्यों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आगामी चुनावों में इन मुद्दों का असर देखने को मिल सकता है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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