बयानबाजी से बढ़ा तनाव
पीठाधीश पद से हटाने के बाद ट्रस्ट और वचनानंद स्वामी आमने-सामने, कानूनी लड़ाई तेज
हरिहर (दावणगेरे). वीरशैव लिंगायत पंचमसाली पीठ के नियंत्रण को लेकर विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। पीठाधीश पद से हटाने और ट्रस्ट गठन के बाद दोनों पक्ष अदालत पहुंच गए हैं।
दोनों पक्षों ने दायर की कैविएट
ट्रस्टियों और निष्कासित वचनानंद स्वामी ने एक-दूसरे के खिलाफ दावणगेरे जिला प्रधान एवं सत्र न्यायालय तथा हरिहर के प्रधान दीवानी न्यायालय में कैविएट दायर की है।
ट्रस्ट की ओर से प्रबंध ट्रस्टी बीसी. उमापति और सचिव ज्योति प्रकाश केएम. पक्षकार बने हैं।
ट्रस्ट का कहना है कि वचनानंद स्वामी को विधिवत पद से हटाया गया है और यदि वे अदालत में जाकर एकतरफा स्थगन आदेश लेने का प्रयास करते हैं, तो उसे रोका जाए।
“बिना सुने आदेश न हो”
वचनानंद स्वामी ने अपनी कैविएट में कहा है कि ट्रस्ट उन्हें मठ की गतिविधियों से दूर रखने के लिए एकतरफा आदेश ले सकता है। इसलिए अदालत उनके पक्ष को सुने बिना कोई निर्णय न दे।
बयानबाजी से बढ़ा विवाद
इस बीच विवाद और तीखा हो गया है। वीरशैव लिंगायत पंचमसाली संघ के युवा इकाई के अध्यक्ष किचडी कोट्रेश और सचिव बीआर. करिबसप्पा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
“खुद चले जाएं तो सम्मान, नहीं तो जबरन हटाएंगे”
नेताओं ने कहा कि यदि वचनानंद स्वामी स्वयं मठ छोड़ते हैं तो उन्हें सम्मानपूर्वक विदा किया जाएगा, अन्यथा उन्हें जबरन हटाया जाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि स्वामी छात्रों के साथ अमानवीय व्यवहार करते थे और अन्य संगठनों के बारे में भी आपत्तिजनक टिप्पणियां करते थे।
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