सफाई और रोशनी से निखरी ऐतिहासिक पहचान
नगर निगम और पर्यटन विभाग की पहल से कचरे के ढेर से पर्यटन स्थल में बदला किला परिसर
रायचूर. कई वर्षों तक उपेक्षा का शिकार रहा रायचूर किला अब नए रूप में नजर आने लगा है। महानगर निगम का दर्जा मिलने और आईएएस अधिकारियों की नियुक्ति के बाद शहर में सकारात्मक बदलाव दिखने लगे हैं, खासकर ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण और विकास में।
कचरे से मुक्ति, किले की खूबसूरती लौटी
पहले किले के खाई में भारी मात्रा में कचरा फेंका जाता था, जिससे इसकी सुंदरता खराब हो गई थी। अब नगर निगम ने करोड़ों रुपए खर्च कर प्लास्टिक कचरा हटाया है और गंदे पानी के निकास की व्यवस्था की है।
तकनीकी अड़चनों का समाधान
नगर निगम आयुक्त जुबिन मोहपात्र ने राज्य पुरातत्व, संग्रहालय और धरोहर विभाग के अधिकारियों को बुलाकर विकास में आ रही तकनीकी समस्याओं का समाधान किया। नगर निगम और पर्यटन विभाग के संयुक्त प्रयास से यह परिवर्तन संभव हुआ है।
बुनियादी सुविधाओं में सुधार
किले के पास स्थित सार्वजनिक शौचालय को हटाकर वहां तटबंध (रिटेनिंग वॉल) बनाया गया है, जिससे वाहन पार्किंग में सुविधा हुई है। साथ ही, किले की जर्जर दीवारों को मजबूत किया गया है।
रोशनी से निखरी शाम की छटा
केंद्रीय बस स्टैंड के पास स्थित किले को आकर्षक रोशनी से सजाया गया है। शाम होते ही रंग-बिरंगी लाइटें जल उठती हैं, जो राहगीरों और पर्यटकों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं।
पर्यटकों की बढ़ी दिलचस्पी
पहले जहां बाहर से आने वाले लोग बदबू के कारण खिड़कियां बंद कर लेते थे, वहीं अब वे किले को देखने के लिए उत्साह से खिड़कियां खोल रहे हैं। परिसर में सुरक्षा के लिए एक चौकीदार भी नियुक्त किया गया है।
वॉकिंग पाथ बना आकर्षण का केंद्र
किले की दीवारों पर उगी घास हटाकर उन्हें मजबूत किया गया है और वहां वॉकिंग पाथ बनाया गया है, जिससे पर्यटकों को नया अनुभव मिल रहा है।
1.25 करोड़ रुपए से हुआ समग्र विकास” – जुबिन मोहपात्र
आयुक्त जुबिन मोहपात्र ने बताया कि रायचूर किले के समग्र विकास के लिए 1.25 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। खाई की सफाई, तटबंध निर्माण और समतलीकरण जैसे कार्य किए गए हैं। साथ ही, अब यहां कचरा फेंकने पर सख्त निगरानी रखी जा रही है।
इतिहास की झलक
रायचूर शहर के मध्य स्थित यह किला वर्ष 1294 में काकतीय शासनकाल में बनाया गया था। इसे रानी रुद्रम्मादेवी के मंत्री राजा गोरे गंगय्या रेड्डी के आदेश पर राजा वि_ल ने बनवाया था। विशाल पत्थर के ब्लॉक्स, गहरी खाई और इंडो-इस्लामिक स्थापत्य इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं। बाद में बहमनी सुल्तानों और विजयनगर साम्राज्य के श्रीकृष्णदेवराय के काल में इसे और मजबूत किया गया।
रायचूर किले का यह कायाकल्प न केवल शहर की पहचान को नई ऊंचाई दे रहा है, बल्कि पर्यटन की संभावनाओं को भी मजबूती प्रदान कर रहा है।
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