केरल में आईयूएमएल का दमदार प्रदर्शन, 27 में से 23 सीटों पर बढ़त

यूडीएफ की जीत में मुस्लिम लीग की बड़ी भूमिका, तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनने की ओर

तिरुवनंतपुरम: केरल विधानसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) की निर्णायक बढ़त के बीच उसकी प्रमुख सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) का प्रदर्शन भी चर्चा के केंद्र में है।

चुनाव आयोग के शुरुआती रुझानों के अनुसार आईयूएमएल ने जिन 27 सीटों पर चुनाव लड़ा, उनमें से 23 पर बढ़त बनाई हुई है। यह प्रदर्शन उसे 140 सदस्यीय विधानसभा में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनने की दिशा में ले जा रहा है।

शानदार स्ट्राइक रेट, रिकॉर्ड के करीब

आईयूएमएल का स्ट्राइक रेट 85 प्रतिशत से अधिक है, जो उसके इतिहास के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में से एक माना जा रहा है। यदि ये बढ़त जीत में बदलती है, तो 2011 में हासिल 20 सीटों के रिकॉर्ड को भी पार किया जा सकता है। 2021 में पार्टी ने 15 सीटें जीती थीं।

वहीं, अन्य दलों की बात करें तो कांग्रेस लगभग 60 से अधिक सीटों पर आगे है, जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) करीब 28 सीटों तक सिमटती दिख रही है।

मलप्पुरम से आगे बढ़ती पकड़

आईयूएमएल ने सिर्फ अपने पारंपरिक गढ़ मलप्पुरम तक सीमित न रहकर राज्य के कई जिलों—कोझिकोड, कासरगोड, पलक्कड़, त्रिशूर, एर्नाकुलम और कन्नूर में भी मजबूत बढ़त दर्ज की है।

मलप्पुरम सीट से वरिष्ठ नेता पी.के. कुन्हालीकुट्टी बढ़त बनाए हुए हैं, जबकि अन्य कई सीटों पर भी पार्टी उम्मीदवार बड़े अंतर से आगे चल रहे हैं।

महिला प्रतिनिधित्व में नई पहल

इस चुनाव में आईयूएमएल ने पहली बार दो महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा, जिनमें से एक एडवोकेट फातिमा तहलिया पेराम्ब्रा सीट पर बढ़त बनाए हुए हैं। यह पार्टी के भीतर बदलते सामाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाता है।

सरकार गठन में बढ़ेगा प्रभाव

यदि मौजूदा रुझान बरकरार रहते हैं, तो आईयूएमएल का बढ़ा हुआ संख्या बल यूडीएफ सरकार में उसकी भूमिका को और मजबूत करेगा। कैबिनेट में हिस्सेदारी और नीतिगत फैसलों में पार्टी का प्रभाव पहले की तुलना में अधिक हो सकता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और स्थिरता

1948 में स्थापित आईयूएमएल ने केरल की राजनीति में सात दशकों से अधिक समय तक स्थिर उपस्थिति बनाए रखी है। यह कांग्रेस के साथ गठबंधन में लगातार चुनाव लड़ती रही है और मुस्लिम समुदाय के बीच मजबूत आधार रखती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आईयूएमएल का यह प्रदर्शन न सिर्फ यूडीएफ की जीत में निर्णायक साबित हो सकता है, बल्कि राज्य की आगामी सरकार की दिशा और संतुलन भी तय करेगा।

 

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By Bharat Ki Awaz

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