बीएलडीई विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय नवजात शिशु पुनर्जीवन प्रशिक्षण दिवस आयोजित
विजयपुर. बीएलडीई डीम्ड विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अरुण सी. इमामदार ने कहा कि नवजात शिशुओं की मृत्यु दर कम करने और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए संरचित नवजात शिशु पुनर्जीवन प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक है।
वे विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित राष्ट्रीय नवजात शिशु पुनर्जीवन प्रशिक्षण दिवस कार्यक्रम का उद्घाटन करने के बाद संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बाल रोग विभाग की सेवा भावना और शैक्षणिक गतिविधियां इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
यह कार्यक्रम बी.एम. पाटील मेडिकल कॉलेज, अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र के बाल रोग विभाग, इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स तथा नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था।
कार्यक्रम “एक दिन-एक राष्ट्र-एक ध्येय : हर सांस के साथ नवजात शिशु की जीवन रक्षा” विषय पर आधारित था। यह देशव्यापी अभियान का हिस्सा था, जिसके अंतर्गत भारत के 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक ही दिन 1100 से अधिक प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित कर 23 हजार से अधिक डॉक्टरों और नर्सों को प्रशिक्षण दिया गया।
विजयपुर में आयोजित इस कार्यशाला में करीब 50 स्वास्थ्यकर्मी, चिकित्सक और नर्सों ने भाग लिया था। प्रशिक्षण के दौरान नवजात शिशुओं को प्रभावी श्वसन सहायता, आपातकालीन स्थिरीकरण तथा टीम आधारित व्यावहारिक प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम में बताया गया कि जन्म के तुरंत बाद सांस लेने में कठिनाई महसूस करने वाले नवजातों को समय पर विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है।
इस अवसर पर चिकित्सा संकाय की डीन एवं प्राचार्या डॉ. तेजस्विनी वल्लभ, एलाइड हेल्थ साइंसेज विभाग के डीन डॉ. एस.वी. पाटील, बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. एम.एम. पाटील सहित कई नवजात शिशु विशेषज्ञ, चिकित्सक, अध्यापक और कर्मचारी उपस्थित थे।
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