अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का आरोप
गो-रक्षा के नाम पर राजनीति नहीं चलेगी
हुब्बल्ली. राष्ट्रीय अहिंद संगठन के राज्य प्रचार समिति अध्यक्ष बाबाजान मुधोल तथा संगठन के अध्यक्ष मुत्तण्णा शिवल्ली ने केंद्र सरकार से देश में गोमांस निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि गो-रक्षा के नाम पर कुछ संगठन और स्वयंभू हिंदुत्ववादी समूह अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहे हैं, जबकि गोवंश के नाम पर राजनीति और व्यापार भी किया जा रहा है।
पत्रकारों से बातचीत में नेताओं ने कहा कि यदि वास्तव में गो-रक्षा के प्रति गंभीरता है तो केंद्र सरकार को गोमांस निर्यात करने वाली कंपनियों के लाइसेंस तत्काल रद्द करने चाहिए। देश के कई मुस्लिम धार्मिक नेता भी गो-संरक्षण के पक्ष में हैं। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी द्वारा गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस पहल का स्वागत करना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि देश के अधिकांश नागरिक मांसाहार का सेवन करते हैं, लेकिन गोवंश के मुद्दे को राजनीतिक लाभ और वोट बैंक की राजनीति के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका दावा था कि यदि गोवंश के संरक्षण की बात की जाती है तो इसके लिए ठोस और व्यावहारिक कदम उठाने चाहिए।
बाबाजान मुधोल ने कहा कि देश में आवारा पशुओं की समस्या किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। खेतों में फसलों को नुकसान और सडक़ दुर्घटनाओं की बढ़ती घटनाओं पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए।
संगठन की ओर से मांग की गई कि जो लोग गो-संरक्षण के लिए कार्य करना चाहते हैं, उन्हें सरकार भूमि तथा रोजगार जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराए, ताकि गोवंश संरक्षण को व्यवहारिक रूप से मजबूत किया जा सके।
इस अवसर पर रमेश भोसले, मौला साब नदाफ, शमशीर गंजेवाले, यूसुफ बल्लारी, विनायक गडिवड्डर, करीम लक्कुंडी, पीरसाब नदाफ तथा के. श्रीधर सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
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