अगुम्बे में जुलाई में भी बारिश का इंतजार
झरने सूखे, पर्यटन प्रभावित
घाट सडक़ की बदहाली ने बढ़ाई चिंता
कुंदापुर (उडुपी). दक्षिण का चेरापूंजी कहे जाने वाले वर्षावन अगुम्बे में इस बार मानसून फीका पड़ गया है। जुलाई के शुरुआती दिनों में हुई हल्की बारिश के बाद पिछले तीन-चार दिनों से क्षेत्र में एक बूंद भी बारिश नहीं हुई है। इसका असर यहां के घने वर्षावनों, झरनों और जलधाराओं पर साफ दिखाई देने लगा है। सामान्यत: इस समय पानी से लबालब रहने वाला अगुम्बे घाट क्षेत्र सूखा नजर आ रहा है।
जलधाराएं सूखी, पर्यटन पर असर
राज्य के सर्वाधिक बारिश वाले क्षेत्रों में शामिल अगुम्बे में औसतन 7,500 से 7,640 मिमी वार्षिक बारिश होती है, जबकि केवल जुलाई में ही लगभग 884 मिमी बारिश दर्ज की जाती है। इस वर्ष बारिश का लंबा अंतराल झरनों, नालों और छोटी नदियों के जलस्तर में भारी गिरावट का कारण बना है। बरकण, अब्बी और जोगीगुंडी जैसे प्रमुख जलप्रपात भी अपेक्षित स्वरूप में नहीं बह रहे हैं, जिससे पर्यटन गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। हालांकि सनसेट प्वाइंट, अगुम्बे दोड्डमने और मालगुडी डेज के फिल्मांकन स्थल पर पर्यटक पहुंच रहे हैं, लेकिन वर्षावन की प्राकृतिक छटा फीकी पडऩे से उन्हें निराशा हाथ लग रही है।
जलवायु परिवर्तन का बढ़ता असर
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक जलवायु परिवर्तन, एल-नीनो प्रभाव और पश्चिमी घाट में भूमि उपयोग में बढ़ते बदलावों ने मानसून के स्वरूप को प्रभावित किया है। वन क्षेत्र में कमी, सुपारी बागानों का विस्तार तथा सडक़ एवं अन्य विकास कार्यों से स्थानीय सूक्ष्म जलवायु भी प्रभावित हो रही है। राज्य में जून के दौरान 42 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज होने के बाद जुलाई के पहले सप्ताह में कुछ सुधार हुआ था, लेकिन अब फिर मानसून कमजोर पड़ गया है।
घाट सडक़ बनी जोखिमभरी
उडुपी जिले के सोमेश्वर से शुरू होने वाला अगुम्बे घाट 14 हेयरपिन मोड़ों वाला कठिन मार्ग है। नौ किलोमीटर लंबी इस सडक़ के कई हिस्सों में सुरक्षा दीवारें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं और ढलानों पर भूस्खलन के निशान दिखाई दे रहे हैं। कई स्थानों पर पेड़ और पत्थर सडक़ पर गिरने की घटनाएं भी सामने आई हैं। नालियों के समुचित रखरखाव के अभाव में बारिश होने पर पानी सडक़ पर बहने लगता है। सुरक्षा को देखते हुए जिला प्रशासन ने सितंबर तक भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। स्थानीय लोगों ने घाट सडक़ की तत्काल मरम्मत और नियमित रखरखाव की मांग की है।
स्थानीय निवासी एम. बालकृष्ण शेट्टी ने कहा कि जुलाई की शुरुआत में हुई बारिश से अच्छी उम्मीद जगी थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से बारिश पूरी तरह थम गई है। इससे छोटे जलस्रोतों का जलस्तर तेजी से घटा है और इस मौसम में हरियाली से लहलहाने वाला अगुम्बे अपनी प्राकृतिक आभा खोता नजर आ रहा है।
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